देश के जाने माने वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव तो आगे जाते हैं. हार जीत तो होती रहती है. लेकिन संविधान की हार नहीं होनी चाहिए और लोकतंत्र की हार नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जो जीता वही सिकंदर लेकिन किस तरह से जीता, क्या षडयंत्र अपनाए, ये अपने आप में एक सवाल उठता है. 

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'प्रधानमंत्री से मैं पूछना चाहता हूं कि आप...'

इसके आगे उन्होंने कहा, "जब बीजेपी की पश्चिम बंगाल में जीत हुई तो हमारे प्रधानमंत्री ने ये कहा कि हम बदले की नीति नहीं बदलाव की नीति अपनाते हैं. ये बड़ा अच्छा बयान है और 2014 के बाद प्रधानमंत्री से मैं पूछना चाहता हूं कि आप बदले की नीति अपनाते रहे या बदलाव की नीति अपनाते रहे. आपने बदले के आधार पर सरकारों का बदलाव किया. जहां बहुमत की सरकारें थीं आपने उसको तोड़कर अपने पक्ष में लोगों को लेकर सरकार बनाई. ये बदलाव की राजनीति थी या बदले की?"

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राज्यसभा सांसद ने कहा, "जिस तरह से आपने मुख्यमंत्रियों के खिलाफ ईडी का इस्तेमाल किया, क्या वो बदलाव की राजनीति थी? सत्ता के बदलाव की राजनीति जरूर थी लेकिन देश के बदलाव से उसका लेना देना कुछ नहीं था."

इस्तीफे पर ममता बनर्जी के बयान पर क्या बोले?

जब उनसे सवाल किया कि ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है, इस पर उन्होंने जवाब देने से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि ऐसा बयान देने वाले व्यक्ति के दिमाग में क्या चल रहा है, इस पर वो कैसे कुछ बोल सकते हैं. उन्होंने कहा, "इस पर मेरा कुछ बोलना ठीक नहीं होगा. अखबारों और सोशल मीडिया पर ये भी कहा जा रहा है कि उन्होंने अपना ये बयान वापस ले लिया है. आप ये सवाल उनसे (ममता बनर्जी) पूछिए. 

जब कपिल सिब्बल से पूछा गया कि इस तरह की स्थिति में कानूनी विकल्प क्या होते हैं तो उन्होंने कहा, "मैं उस सवाल का जवाब नहीं देने जा रहा जो काल्पनिक हो."

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