नई दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के परिसर में बने अवैध बारात घर, डिस्पेंसरी और डायलिसिस सेंटर पर दिल्ली नगर निगम ने बुलडोजर एक्शन किया. एमसीडी ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की थी हालांकि, कार्रवाई के बीच में ही अफवाह फैल गई कि फैज-ए-इलाही मस्जिद पर भी बुलडोजर एक्शन होना है.

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इस वजह से इलाके के लोगोंं ने पुलिस पर पथराव किया और जवाबी कार्रवाई में दिल्ली पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया. हालांकि, मामले पर नियंत्रण पाकर पुलिस की मौजूदगी में सुबह से ही मलबा हटाने का काम शुरू हुआ और फिर शाम होते-होते बचा हुआ अवैध निर्माण भी ढहा दिया गया. फिलहाल मलबा हटाने का काम जारी है.

हिंसा को लेकर क्या बोले स्थानीय लोग?

स्थानीय लोगोंं की मानें तो हिंसा इसलिए भड़की क्योंकि एमसीडी ने अफवाह को आगे बढ़ने दिया. चोरों की तरह आधी रात को बिना लोगों को बताए बुलडोजर चलाना शुरू कर दिया. कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि एमसीडी धर्म के नाम पर कार्रवाई कर रही है. मुस्लिमों के निर्माण को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि हिंदू स्थानों के अवैध निर्माण पर एमसीडी चुप है. 

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एमसीडी ने दी यह जानकारी

एमसीडी के मुताबिक फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास कुल 36 हजार स्क्वायर फीट की जगह पर बारात घर, डिस्पेंसरी और डायलिसिस सेंटर का अवैध कब्जा था जिसे हटाया गया. सैटेलाइट तस्वीरों और आम लोगों की माने तो फैज-ए-इलाही मस्जिद के परिसर में बारात घर साल 2005 से बना था जिसकी तसदीक साल 2010 की सैटेलाइट तस्वीरों से हो रही है.

हालांकि, साल 2012 की तस्वीर में तसदीक हुई है कि बाईं ओर बारात घर का विस्तार किया गया और फिर साल 2016 में डायलिसिस सेंटर और डिस्पेंसरी का काम शुरू हुआ जो 2018 में खत्म हुआ और साल 2018 की सैटेलाइट तस्वीर इसकी तसदीक करती है, जो मस्जिद के दाईं ओर है.

अब बड़ा सवाल ये है जब जमीन एमसीडी की थी तो कैसे उसकी नाक के नीचे 20 साल तक कथित रूप से अवैध निर्माण होता रहा और एमसीडी ने कार्रवाई नहीं की. ऐसी क्या वजह थी कि एमसीडी ने ध्वस्तीकरण का समय आधी रात तय किया और सुबह होने का इंतजाार नहीं किया.