दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में बनी फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास किए गए अतिक्रमण पर आधी रात को MCD का बुलडोजर चला. इस दौरान कुछ उपद्रवियों, असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की. पुलिस और अतिक्रमण हटाने गई टीम पर पथराव किया. पत्थरबाजी और भीड़ को मौके पर इकट्ठा करने के कई वीडियो सामने आए हैं. वीडियो के आधार पर आरोपियों के खिलाफ एक्शन हो रहा है. पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है. पुलिस, कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है. लेकिन इन सब के बीच कुछ सवाल खड़े हो रहे हैं.

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ये अतिक्रमण PWD और MCD की जमीन पर हुआ तो क्यों इन एजेंसियों ने अपनी जमीन पर ये निर्माण होने दिया? जिस बारात घर पर बुलडोजर चला है, उसका निर्माण हुए 20 साल से भी ज्यादा का वक्त हो चुका है तो अब तक एजेंसियों की आंख क्यों नहीं खुली? जिस जमीन को विवादित बताकर ढहाया गया, उस पर 7-8 साल से डायग्नोस्टिक सेंटर चल रहा था, सरकारी एजेंसियां क्या सो रही थीं? 

मामले की याचिकाकर्ता की मानें तो उन्होंने इस अतिक्रमण के खिलाफ कई महीनों तक खत लिखे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई तो क्या इस अवैध निर्माण में अधिकारियों की मिलीभगत थी? देश में आखिर ये कैसा ट्रेंड चल पड़ा है कि जब भी किसी अतिक्रमण पर एक्शन होता है तो अमन खतरे में क्यों आ जाता है?

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एक्शन की टाइमिंग पर खड़े हो रहे सवाल

सबसे बड़ा सवाल तो एक्शन की टाइमिंग को लेकर है. मंगलवार (06 जनवरी 2026) की आधी रात करीब 12 बजे तुर्कमान गेट के पास पुलिस की तैनाती की गई. करीब साढ़े 12 बजे 32 बुलडोजर, 50 डंपर और 200 से ज्यादा मजदूर मौके पर पहुंचे. रात 1 बजे बुलडोजर एक्शन की शुरुआत होनी थी. इससे पहले ही वहां स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई. इसके बाद करीब सवा 1 बजे पुलिस ने लोगों को वहां से हटाना शुरू किया. 1 बजकर 23 मिनट पर पुलिस के खिलाफ पत्थरबाजी शुरू हो गई.

मौके पर हंगामा, पत्थरबाजी और उपद्रव

10 मिनट तक मौके पर हंगामा, पत्थरबाजी और उपद्रव होता रहा. हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने भीड़ और उपद्रवियों को खदेड़ना शुरू कर दिया. भीड़ को खदेड़ने के लिए पुलिस की तरफ से आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए. करीब 1 बजकर 30 मिनट के पास बुलडोजर एक्शन की शुरुआत हुई. साढ़े 5 घंटे तक अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलता रहा और सुबह 7 बजे जाकर काम पूरा हुआ.

रात में कार्रवाई को लेकर क्या बोले डीसीपी?

सर्दियों के मौसम में रात लंबी होती हैं. ऐसे में सब कुछ रात के अंधेरे में ही अंजाम दिया गया. अब इसी को लेकर स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं. कह रहे हैं कि अगर रात के अंधेरे में अतिक्रमण पर एक्शन नहीं होता तो हालात नहीं बिगड़ते. रात के अंधेरे में कार्रवाई करने की जरूरत आखिर क्या थी? यही सवाल जब एबीपी न्यूज़ ने डीसीपी से किया तो उन्होंने कहा, "दिन में इसलिए कार्रवाई नहीं की गई क्योंकि नज़दीक में ITO मौजूद है, जहां दिन के समय में भारी जाम की समय पैदा हो सकती थी. साथ ही MCD ने जिस समय सुरक्षा मांगी कार्रवाई के लिए उस समय फ़ोर्स दी गई."

स्थानीय लोगों का क्या है आरोप?

रात के अंधेरे में एक्शन पर स्थानीय लोगों के अपने आरोप हैं. पुलिस की अपनी दलीलें हैं. लेकिन आधी रात के बुलडोजर एक्शन पर सियासी बयानबाजी का बुलडोजर तेजी से चल रहा है. क्योंकि अवैध निर्माण अचानक नहीं हुआ. ना ही अचानक एक्शन के ऑर्डर हुए. अदालत में भी कार्यवाही चली. इसके बाद ये कार्रवाई हुई.

पहले तो रात के अंधेरे में एक्शन और इतने सालों तक अवैध निर्माण के खिलाफ सरकारी एजेंसियों की सुस्ती, इस मामले में सवाल कई हैं. इस बीच एक नजर अवैध निर्माण की पहचान से लेकर बुलडोजर एक्शन तक की टाइमलाइन पर डालना जरूरी है. ताकि ये पता चल सके कि सरकारी एजेंसियां पहले करप्शन की नींव पर अवैध निर्माण होने देती हैं. सालों बाद उनकी नींद टूटती है तो अवैध निर्माण के खिलाफ एक्शन अमन के लिए खतरा बन जाता है.

  • Save India Foundation नाम के NGO की तरफ से MCD को एक शिकायत की गई जिसमें रामलीला मैदान की जमीन पर अतिक्रमण की बात कही गई और इसे तुरंत हटाने की मांग की गई.
  • 16 अक्टूबर 2025 को DDA, MCD और L&DO तीन विभागों ने मिलकर ज्वॉइंट सर्वे किया.
  • सर्वे में पाया गया कि 2 हजार 512 स्क्वायर फीट जमीन और फुटपाथ पर अतिक्रमण है.
  • इसके अलावा 36 हजार 428 स्कैवयर फीट रामलीला मैदान की जमीन पर अवैध तरीके से बारात घर, पार्किंग और डायग्नोस्टिक सेंटर चल रहा है.
  • मामला हाईकोर्ट में गया. कोर्ट ने 12 नवंबर 2025 को MCD को अवैध अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए. साथ ही सभी पक्षों को सुनवाई का मौका देने के लिए कहा.
  • 22 दिसंबर को MCD ने माना कि 0.195 एकड़ के अलावा किसी जमीन पर दिल्ली वक्फ बोर्ड या मैनेजमेंट कमेटी का कोई मालिकाना हक नहीं है.
  • कल 6 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई.
  • हाईकोर्ट ने मामले को विचार योग्य माना और संबंधित विभागों को नोटिस देकर जवाब मांगा.
  • इस दौरान मस्जिद मैनेजमेंट कमेटी को कोर्ट से Status Quo की उम्मीद थी. कोर्ट ने ऐसा नहीं किया और 6 जनवरी की रात अतिक्रमण पर बुलडोजर एक्शन हो गया.

याचिकाकर्ता का क्या कहना है?

इस पूरे मामले में जो याचिकाकर्ता हैं उनका कहना है कि उन्होंने एमसीडी को कई लेटर लिखे लेकिन पहले एजेंसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया. तो क्या इस अशांति के लिए एमसीडी जिम्मेदार नहीं है?

अतिक्रमण पर एक्शन अमन कैसे बिगाड़ देता है?

धार्मिक स्थानों के आसपास होने वाले अतिक्रमण पर पहले एजेंसियां कोई ध्यान नहीं देतीं. कुछ वक्त बाद धार्मिक स्थलों के आसपास हुआ अतिक्रमण धार्मिक स्थल की आस्था से जुड़ जाता है. कुछ मुस्लिम नेताओं का आरोप है कि जानबूझकर उनके धर्म स्थलों को ही टारगेट किया जा रहा है. अवैध निर्माण की आड़ में उनके मस्जिद-मदरसों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है. बाद में जब ऐसे धार्मिक स्थलों के अतिक्रमण पर एक्शन होता है तो अमन बिगड़ने का खतरा हो जाता है.

नदवी पर भीड़ को उकसाने का आरोप

इस बीच दिल्ली की मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन को लेकर जमकर सियासी शोले उठ रहे हैं. घटना वाली जगह से समाजवादी पार्टी सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का वीडियो सामने आया है. नदवी पर भीड़ को उकसाने का आरोप लग रहा है.

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने क्या कहा?

वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर कितनी मस्जिद तोड़ोगे. AAP विधायक अमानतुल्लाह खान कह रहे हैं कि इन्हें मुसलमानों पर जुल्म करने के अलावा आता ही क्या है. AIMIM के दिल्ली अध्यक्ष शोएब जमाई ने कहा कि दिल्ली में भी यूपी मॉडल लागू किया जा रहा है. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा है कि धार्मिक उन्माद भड़काने की कोशिश थी. दिल्ली के मेयर राजा इकबाल सिंह का कहना है कि कुछ धार्मिक लोग जनता को गुमराह करने की कोशिश करते हैं.