देश की राजधानी में एक ऐसी चौंकाने वाली धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है. बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जिसने एक ही फ्लैट को दो-दो बैंकों में गिरवी रखकर करोड़ों रुपये का लोन हड़प लिया. फिर पत्नी सहित फरार हो गया.
धोखाधड़ी की पटकथा
2019 में राजौरी गार्डन स्थित यस बैंक की शाखा में मनीष और उसकी पत्नी अनीता, निटमैक्स इंडिया प्रा. लि. के नाम से 3 करोड़ रुपये की ओवरड्राफ्ट सुविधा के लिए पहुंचे. उन्होंने द्वारका सेक्टर-8 स्थित एक फ्लैट को गिरवी रखा और दावा किया कि यह पूरी तरह कानूनी और बेदाग है. बैंक ने दस्तावेज देखे, जो बाद में फर्जी निकले, और बिना ज्यादा पूछताछ के लोन पास कर दिया.
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती
कुछ महीनों बाद जब मनीष और अनीता ने लोन की किश्तें नहीं चुकाईं और बैंक अधिकारी जब उनके दिए पते पर पहुंचे, तो वहां ताले लटके मिले. जांच आगे बढ़ी तो बैंक के होश उड़ गए वही फ्लैट पहले से ड्यूश बैंक के पास 2.7 करोड़ के लोन के लिए गिरवी रखा जा चुका था..
सेल डीड नकली, दस्तावेज फर्जी
जांच में सामने आया कि मनीष और अनीता ने न सिर्फ सेल डीड फर्जी बनाई थी, बल्कि उस पर उप-पंजीयक के नकली हस्ताक्षर भी कर दिए थे. सब-रजिस्ट्रार ऑफिस से दस्तावेज निकालकर जब मिलान किया गया, तो साफ हुआ कि यह पूरे तरीके से फर्जीवाड़ा है.
पत्नी पहले पकड़ी गई, मनीष 1 साल से फरार था
शातिर मनीष की पत्नी अनीता को पिछले साल 27 अप्रैल 2024 को गिरफ्तार किया गया था. वहीं मनीष फरार चल रहा था और आर्थिक अपराध शाखा उसे भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया में जुटी थी. आखिरकार लंबी जांच और तकनीकी निगरानी के बाद पुलिस ने 28 अप्रैल 2025 को मनीष को भी दबोच लिया.
कपड़े का एजेंट बना करोड़ों का ठग
मनीष की कहानी फिल्मी लगती है. तीन मूर्ति मार्ग के सरकारी क्वार्टर में पले-बढ़े मनीष ने राजौरी गार्डन में एक मामूली कपड़े के एजेंट के रूप में काम शुरू किया था. लेकिन 2018 में जब उसने निटमैक्स इंडिया नाम से कंपनी बनाई, तभी से उसकी नीयत बिगड़ गई. अपनी कंपनी को 'बड़ा बिजनेस' दिखाकर बैंक से मोटा लोन लेने का प्लान बनाया और सिस्टम की कमज़ोरियों का फायदा उठाकर करोड़ों हड़प लिए.
क्या अकेले मनीष और अनीता ही दोषी हैं?
EOW सूत्रों की मानें तो इस तरह की धोखाधड़ी बिना किसी अंदरूनी मदद के संभव नहीं. दस्तावेजों की वैधता जांचने वाली बैंकिंग प्रणाली की लापरवाही पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
जांच जारी, और गिरफ्तारियां संभव
आर्थिक अपराध शाखा अब इस पूरे गिरोह की जड़ तक पहुंचने की कोशिश में है. यह भी जांच की जा रही है कि क्या ऐसे और मामले भी हैं जहां इसी तरह एक ही संपत्ति को बार-बार गिरवी रखकर बैंकों को चूना लगाया गया है.