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नया साल दिल्ली पुलिस के लिए सिर्फ कैलेंडर बदलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई पुलिसकर्मियों की जिंदगी में एक नई पहचान लेकर आया. साल के पहले दिन 105 जवानों को समय से पहले पदोन्नति देकर पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा ने साफ कर दिया कि मेहनत, साहस और ईमानदार सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा.

जब नए साल की सुबह पुलिसकर्मियों ने पदोन्नति सूची में अपना नाम देखा, तो उनके लिए यह पल किसी उत्सव से कम नहीं था. कई जवानों के लिए यह तरक्की वर्षों की मेहनत और जोखिम भरी ड्यूटी का परिणाम थी. इससे पहले 31 दिसंबर को भी 137 सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को एक रैंक ऊपर मानद पद देकर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई थी, जिसने विभाग में सकारात्मक संदेश दिया.

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आयुक्त का संदेश, बेहतर काम का मिलेगा बेहतर सम्मान

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा के नेतृत्व में विभाग में वेलफेयर और प्रोफेशनलिज्म को नई प्राथमिकता मिली है. ऐसे फैसलों से न सिर्फ प्रमोशन पाने वाले जवानों का हौसला बढ़ता है, बल्कि पूरे बल में बेहतर प्रदर्शन की प्रतिस्पर्धा भी पैदा होती है.

250 नामों की हुई गहन जांच

दिल्ली पुलिस की अलग-अलग यूनिटों से 250 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के नाम समय से पहले पदोन्नति के लिए सामने आए थे. इन सभी मामलों की समीक्षा एक उच्च स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी ने की. स्पेशल सीपी एचआरडी, क्राइम और इंटेलिजेंस से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने हर जवान की ड्यूटी, जोखिम उठाने की क्षमता और पेशेवर योगदान को विस्तार से परखा. कई मामलों में जवानों को व्यक्तिगत रूप से बुलाकर उनकी भूमिका समझी गई.

105 नामों पर लगी तरक्की की मोहर

सभी पहलुओं पर विचार के बाद 105 जवानों को ओटीपी के लिए उपयुक्त पाया गया. आयुक्त के निर्देश पर 31 दिसंबर को ही अंतिम मंजूरी दे दी गई. इस प्रक्रिया में तीन सब इंस्पेक्टर इंस्पेक्टर बने, दो एएसआई को सब इंस्पेक्टर बनाया गया, 49 हेड कांस्टेबल को एएसआई और 51 कांस्टेबल को हेड कांस्टेबल के पद पर पदोन्नत किया गया.

इस बार हर यूनिट को मिला बराबर मौका

ओटीपी प्रक्रिया में इस बार एक स्पष्ट बदलाव नजर आया. पहले जहां स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच का दबदबा रहता था, वहीं इस बार ट्रैफिक, जिला पुलिस और अन्य अहम शाखाओं में तैनात जवानों को भी प्राथमिकता दी गई. आंकड़ों के अनुसार स्पेशल सेल से 19 और क्राइम ब्रांच से 20 पुलिसकर्मियों को ही ओटीपी मिला, जिससे संतुलित चयन की नीति साफ झलकती है.

जिनका नाम नहीं आया, उनकी उम्मीद अभी बाकी

सूची से बाहर रह गए जवानों में भी निराशा से ज्यादा भरोसा दिखाई दे रहा है. खासकर स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच के वे पुलिसकर्मी, जो रोज जान जोखिम में डालकर खतरनाक अपराधियों से मुकाबला करते हैं. गोली लगने और घायल होने के बावजूद ड्यूटी पर लौटने वाले इन जवानों को उम्मीद है कि आने वाले समय में उनके काम और बलिदान को भी पहचान मिलेगी. विभाग में बदले माहौल ने उन्हें यह भरोसा दिया है कि उनकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी.