वसंत ऋतु के स्वागत से पहले दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने राजधानी के पार्कों और ग्रीन बेल्ट को रंग-बिरंगे फूलों से सजाने की व्यापक योजना पर काम शुरू कर दिया है. इस बार ट्यूलिप के साथ-साथ देसी और विदेशी किस्मों के फूल भी शहर की हरियाली को नया रूप देंगे.

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DDA की योजना सिर्फ फूल लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने की भी है. इसके लिए पार्कों और ओपन ग्रीन स्पेस में फूलों की क्यारियों के चारों ओर जालियां लगाई जा रही हैं. इन जालियों का उद्देश्य मवेशियों और आवारा जानवरों से फूलों को बचाना है, साथ ही चोरी की घटनाओं पर भी रोक लगाना है.

ट्यूलिप की सुरक्षा पर विशेष जोर

राजधानी में ट्यूलिप फूलों की चोरी की शिकायत अक्सर सामने आती रही हैं. इसी वजह से इस बार ट्यूलिप को खास निगरानी में लगाया जाएगा. मौसम अनुकूल रहने पर ट्यूलिप के बल्ब सामान्य तौर पर दस से बीस दिनों तक खिले रहते हैं. DDA ने हॉर्टिकल्चर विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दिल्ली के ग्रीन स्पेस में इस दौरान फूलों की रंगत साफ नजर आनी चाहिए.

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द्वारका और यमुना किनारे दिखेंगे रंगीन ट्यूलिप

इस योजना के तहत ट्यूलिप को चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा. द्वारका के ग्रीन एरिया और DDA के विभिन्न पार्कों में पांच से छह अलग-अलग रंगों के ट्यूलिप लगाए जाएंगे. यमुना किनारे स्थित पार्कों में भी ट्यूलिप की मौजूदगी देखने को मिलेगी. इसके अलावा दो से तीन चुनिंदा पार्कों में फरवरी या मार्च के दौरान फ्लावर फेस्टिवल आयोजित करने की तैयारी है. DDA की कोशिश है कि यह आयोजन फरवरी में ही किया जाए.

पिछले अनुभवों से सबक, इस बार सख्त इंतजाम

पिछले दो वर्षों से द्वारका क्षेत्र में बड़ी संख्या में ट्यूलिप लगाए जा रहे हैं, लेकिन मवेशियों की घुसपैठ और फूलों की चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं. इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा इंतजामों को पहले से अधिक मजबूत किया गया है, ताकि वसंत के मौसम में दिल्ली के पार्क लंबे समय तक फूलों की खूबसूरती से सजे रहें.