दिल्ली विधानसभा का मानसून सत्र 7 अगस्त से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगा. इस दौरान सदन में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है. विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की बैठक में सत्र के कामकाज को मंजूरी दे दी गई. बैठक में तय किया गया कि इस सत्र में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की दो रिपोर्टें, दिल्ली बिजली नियामक आयोग (डीईआरसी) से जुड़ी एक अधिसूचना और तीन महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश किए जाएंगे.

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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पेश करेंगी कैग की दो रिपोर्टें

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री रेखा गुप्ता सदन में कैग की दो अहम रिपोर्टें रखेंगी. पहली रिपोर्ट 31 मार्च 2023 को समाप्त अवधि के दौरान दिल्ली सरकार के कामकाज और खर्च से जुड़ी है.

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दूसरी रिपोर्ट वर्ष 2024-25 के दौरान दिल्ली सरकार की वित्तीय स्थिति पर आधारित है. इन रिपोर्टों में सरकार की आय, खर्च, योजनाओं के क्रियान्वयन और सरकारी विभागों के कामकाज का लेखा-जोखा होता है.

कैग की रिपोर्ट को सरकारी खर्च और योजनाओं की जांच का सबसे भरोसेमंद दस्तावेज माना जाता है. इन रिपोर्टों पर सदन की समितियां भी आगे विस्तार से विचार करती हैं. माना जा रहा है कि इन रिपोर्टों को लेकर विपक्ष सरकार से कई सवाल पूछ सकता है, जबकि सरकार अपने कामकाज और फैसलों का पक्ष रखेगी.

ऊर्जा मंत्री आशीष सूद दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग के ओपन एक्सेस नियमों में किए गए दूसरे संशोधन से जुड़ी अधिसूचना और उसके शुद्धिपत्र को सदन के पटल पर रखेंगे. ओपन एक्सेस व्यवस्था के तहत बड़े बिजली उपभोक्ताओं को अपनी पसंद के बिजली आपूर्तिकर्ता से बिजली खरीदने का विकल्प मिलता है.

सरकार का कहना है कि समय-समय पर नियमों में बदलाव करके बिजली व्यवस्था को और बेहतर बनाने की कोशिश की जाती है. इस संशोधन पर भी सदन में चर्चा होने की संभावना है.

तीन अहम विधेयक होंगे पेश

सत्र के दौरान तीन महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश किए जाएंगे. इनमें सबसे प्रमुख दिल्ली (नागरिकों को समयबद्ध सेवाओं की उपलब्धता का अधिकार) विधेयक, 2026 है. इस विधेयक के जरिए वर्ष 2011 में बने पुराने कानून को निरस्त करने का प्रस्ताव है. सरकार का उद्देश्य समयबद्ध सरकारी सेवाओं से जुड़े कानून को नए प्रावधानों के साथ आगे बढ़ाना बताया जा रहा है. हालांकि नए विधेयक के सभी प्रावधान सदन में पेश होने के बाद ही स्पष्ट होंगे.

दूसरा विधेयक दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (डीयूएसआईबी) अधिनियम, 2010 में संशोधन से जुड़ा है. यह बोर्ड राजधानी में झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों के विकास, आश्रय गृहों के संचालन और कमजोर वर्गों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम करता है. प्रस्तावित संशोधन में अधिनियम की एक परिभाषा से संबंधित प्रावधान में बदलाव किया जाएगा.

तीसरा विधेयक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (इन्क्रेडिबल इंडिया) बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठान (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2007 और उससे जुड़े वर्ष 2010 तथा 2021 के संशोधन कानूनों को समाप्त करने से संबंधित है. बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना के तहत लोग अपने घरों के कुछ कमरों को पर्यटकों के लिए किराये पर उपलब्ध करा सकते हैं. सरकार अब इस कानून की जगह नई व्यवस्था या अलग नियम लागू करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है.

बीएसी की बैठक में कई सदस्य रहे मौजूद

बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के अलावा उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, मुख्य सचेतक अभय वर्मा, ओम प्रकाश शर्मा, सोम दत्त, जितेंद्र महाजन और सुरेन्द्र कुमार भी मौजूद रहे. बैठक में सभी सदस्यों ने मानसून सत्र के विधायी कामकाज पर सहमति जताई.

क्यों अहम माना जा रहा है यह सत्र?

दिल्ली विधानसभा का यह मानसून सत्र इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें वित्तीय जवाबदेही, सरकारी सेवाओं, बिजली व्यवस्था, शहरी विकास और पर्यटन से जुड़े कई विषय एक साथ सदन में आएंगे.

कैग की रिपोर्टों पर विपक्ष सरकार से सवाल पूछ सकता है, जबकि सरकार अपने कामकाज और नीतियों का पक्ष रखेगी. इसी तरह नए विधेयकों पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है.

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हर साल मानसून सत्र में सरकार अपने नए कानूनों और नीतियों को सदन के सामने रखती है. विधानसभा में किसी भी विधेयक को कानून बनने से पहले चर्चा, सुझाव और मतदान की प्रक्रिया से गुजरना होता है. ऐसे में आने वाले दिनों में दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही पर राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम लोगों की नजर रहेगी. यह सत्र राजधानी के प्रशासन और भविष्य की नीतियों को दिशा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.