कांग्रेस द्वारा अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाए जाने के फैसले को लेकर सियासी घमासान जारी है. इस बीच कांग्रेस नेताओं ने सफाई दी है. कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा, "कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने स्वीकार नहीं किया बल्कि तय किया है. इस देश को जिन्होंने आजादी दिलाई, चाहें वो महात्मा गांधी हों, सुभाष चंद्र बोस हों, जवाहर लाल नेहरू हों, सरदार पटेल हों या फिर मौलाना अबुल कलाम आजाद हों उन्होंने जो तय किया है. उसी रास्ते पर हम चलेंगे."

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उन्होंने आगे कहा, "जब यह सारे लोग वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत बनाने के लिए दो अंतरों पर फैसला ले रहे थे, जब ये लोग कांग्रेस पार्टी के अंदर मुस्लिम लीग से लड़ रहे थे ठीक उस समय बीजेपी के जो पूर्वज हैं हिंदू महासभा के लोग और वीर सावरकर की पार्टी वो मुस्लिम लीग के साथ देश में सरकारें बना रहे थे."

उन्होंने कहा, "जब महात्मा गांधी भारत छोड़ो आंदोलन चला रहे थे उस समय हिंदू महासभा के लोग और श्यामा प्रसाद मुखर्जी मुस्लिम लीग के साथ सरकार में थे और ब्रिटिश गवर्नर को चिट्ठी लिख रहे थे कि मुस्लिम लीग के साथ मिलकर हम भारत छोड़ो आंदोलन को कुचलने के लिए हर तरह से तैयार हैं."

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'अब ये लोग कांग्रेस को सिखाएंगे की देशभक्ति...'

गुरदीप सप्पल ने आगे कहा, "अब यह लोग कांग्रेस को सिखाएंगे कि देशभक्ति क्या होती है. क्या ये लोग सिखाएंगे जिन्होंने आजादी की लड़ाई नहीं लड़ी." उन्होंने आगे कहा, "वंदे मातरम् कांग्रेस पार्टी का गीत अब से नहीं है बल्कि 1896 से है. 1896 में कांग्रेस ने वंदे मातरम् को अपनाया था और पूरे आजादी के आंदोलन में जब कांग्रेस के लोग जेल जाते थे, जब भारत छोड़ो आंदोलन में कांग्रेस के हजारों लोग शहीद होते तो वंदे मातरम् का नारा लगाते थे."

बीजेपी पर निशाना साधते हुए सप्पल ने कहा, "आज बीजेपी उस नारे का इस्तेमाल देश को बांटने के करना चाहती है. यह कांग्रेस पार्टी कभी नहीं होने देगी. वंदे मातरम् भारत को एकजुट करने का नारा है. वह कांग्रेस का कौमी नारा है और कांग्रेस पार्टी ने ही उसको जिंदा रखा था और आज भी कांग्रेस पार्टी उसी रास्ते पर चलने के लिए तैयार है. इसका फैसला वर्किंग कमेटी ने लिया है."

कांग्रेस नेता शकील अहमद खान ने क्या कहा?

कांग्रेस नेता शकील अहमद खान ने मामले पर कहा, "सीडब्ल्यूसी हम सभी के लिए सर्वोच्च और सबसे सम्मानित संस्था है और रवींद्रनाथ टैगोर, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और राजेंद्र प्रसाद जैसे महान नेताओं के विचारों और निर्णयों का पालन करना होगा. इन महान नेताओं ने सामूहिक रूप से जो तय किया है हमें उनके निर्णयों का सम्मान करना चाहिए और उनको ही मानना है.

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