Delhi News: दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कम्युनिकेशन एवं मीडिया विभाग ने जारी बयान में कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) समर्थकों को पार्टी की हार का आभास शुरू से था. जिस कारण कई वर्गों ने ‘आम आदमी पार्टी’ की जगह कांग्रेस को समर्थन देने का निर्णय लिया. चुनावी हार और साख गिरने की बौखलाहट में अब आम आदमी पार्टी कांग्रेस पर झूठे आरोप लगा रही है, जबकि उन्हें पहले अपने दामन पर लगे गंभीर आरोपों का जवाब देना चाहिए. इनकी बौखलाहट की वजह से इन पर खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे वाली कहावत पूरी तरह से लागू होती है. कांग्रेस कम्युनिकेशन विभाग द्वारा आम आदमी पार्टी से स्पष्ट और सार्वजनिक उत्तर की मांग की क्या आम आदमी पार्टी शराब घोटाले में चार्जशीटेड नेताओं की पार्टी नहीं है? पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर लगे गंभीर आरोपों का जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा और पार्टी भ्रष्टाचारी नेताओं पर अब तक क्यों कोई कार्रवाई नहीं कर रही है ? क्या बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच कोई ‘सीक्रेट गठबंधन’ है? यदि नहीं, तो सीबीआई और ईडी की जांच के बावजूद आम आदमी पार्टी के बड़े नेता आज़ाद कैसे घूम रहे हैं? विदेशी चंदे के मामले में सीबीआई द्वारा एफसीआरए कानून उल्लंघन की जांच में अब तक कोई गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? वर्ष 2017 में आयकर विभाग द्वारा दिए गए नोटिस के अनुसार ‘आप’ ने 2014 में अपने चंदे के स्रोत को गलत बताया, जिससे 30.67 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी हुई- इस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? चुनाव आयोग को दिए गए खर्च में काले धन को क्यों नहीं बताया गया? ‘आप’ के चुनावी खर्च की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई जा रही? कांग्रेस कम्युनिकेशन विभाग ने पूछा कि 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने जिन 50 लाख के चार फर्जी चेक जमा किए थे, उनकी सत्यता की जांच क्यों नहीं की गई. यदि जांच हुई है तो उस पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जब कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी को चेक से केवल 20 करोड़ रुपये प्राप्त होते हैं, तो पंजाब और दिल्ली तक सिमटी और अपने अंतिम काल में चल रही ‘आम आदमी पार्टी’ को 16 करोड़ रुपये से अधिक के चेक कैसे मिलते हैं? क्या 2015 के विधानसभा चुनाव की तरह ही ये चेक फर्जी थे, इस पर जांच कब होगी? बीजेपी और आम आदमी पार्टी दोनों ने अपनी सारी आमदनी चेक से दिखाई है, कैश में हुई आमदनी को आखिर क्यों छुपाया गया जबकि अधिकांश खर्च काला धन चुनाव में हुआ, क्या यह संयोग है या संकेत कि दोनों के बीच पर्दे के पीछे कोई सांठगांठ है?
क्या यह सही नहीं कि आम आदमी पार्टी आरएसएस की ही एक राजनीतिक प्रयोगशाला थी, जिसे बीजेपी ने दिल्ली की सत्ता में बैकडोर से प्रवेश करने के लिए खड़ा किया? क्यों अधिकतर कैग रिपोर्ट विधानसभा में पेश नहीं की गई, और जो पेश की गई, उन पर अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? कांग्रेस पर लगाए गए आरोप निराधार और भ्रामक हैं. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कम्युनिकेशन विभाग ने बताया कि मीडिया में जानबूझकर फैलाई गई खबरों का जवाब साफ है. 7 जनवरी से 10 फरवरी 2025 के बीच कांग्रेस को जो राशि राष्ट्रीय पार्टी मुख्यालय को प्राप्त हुई, वह पूरी तरह वैधानिक है. जबकि आम आदमी पार्टी ने इस अवधि में मात्र 2,000 की राशि दिखाकर पूरे चुनावी वित्त का मज़ाक बनाया है. यह खुद में एक बड़ा घोटाला है. बीजेपी ने कांग्रेस के खाते फ्रिज़ करवाने से लेकर ना जाने तमाम जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर देख लिया और एक रुपये का गड़बड़झाला नहीं मिला, तो खुद की जगह अपनी बी टीम आप पार्टी को खड़ा कर दिया है; जबकि बीजेपी को सीधे-सीधे कांग्रेस से लड़ने की हिम्मत दिखानी चाहिए ना कि बी टीम की मदद लेनी चाहिए. यदि आम आदमी पार्टी में साहस है, तो वह खुद पर लगे इन सवालों का जवाब सार्वजनिक रूप से दे, अन्यथा उसे अपनी राजनीतिक असफलताओं के लिए दूसरों पर दोषारोपण बंद करना चाहिए. कम्युनिकेशन विभाग ने स्पष्ट कहा कि जो दूसरों से सवाल करता है, उसे पहले खुद जवाबदेह होना चाहिए. भ्रष्टाचार के दलदल में फंस चुकी आम आदमी पार्टी इन सवालों से बच नहीं सकती.
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