दिल्ली के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने 52 वर्षीय एक ऐसे मरीज की सुनने की क्षमता को ‘कॉक्लियर इम्प्लांट’ की मदद से बहाल किया है. यह मरीज नेत्रहीन होने के साथ-साथ सिज़ोफ्रेनिया से भी पीड़ित है. चिकित्सकों का कहना है कि यह प्रक्रिया मरीज के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करने में भी मदद कर सकती है, क्योंकि इससे वह अपने आसपास के वातावरण से फिर से जुड़ सकेगा.

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मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल-द्वारका की ओर से जारी बयान के अनुसार, मरीज ने सात वर्ष पहले इलाज न होने वाले मोतियाबिंद के कारण अपनी आँखों की रोशनी खो दी थी. हाल ही में एक वायरल संक्रमण के बाद उसे दोनों कानों से सुनना बंद हो गया था. इससे वह लगभग पूरी तरह बाहरी दुनिया से कट सा गया था. मरीज की स्थिति को देखते हुए ब्रेनस्टेम इवोक्ड रिस्पांस ऑडियोमेट्री (BERA) सहित आवश्यक जांचें बेहोशी की स्थिति में की गईं, ताकि श्रवण हानि की गंभीरता का आकलन किया जा सके और ‘कॉक्लियर इम्प्लांट’ के लिए उसकी उपयुक्तता तय की जा सके.

कैसे सुनने की क्षमता लौटी वापस?

कान के डॉक्टर (ENT), एनेस्थीसिया, ऑडियोलॉजी और मनोरोग विशेषज्ञों की एक बहु-विषयक टीम ने मरीज के दोनों कानों में ‘कॉक्लियर इम्प्लांट’ सर्जरी की. इस दौरान मरीज की मानसिक स्थिति को प्रभावित न करने वाली दवाओं का विशेष ध्यान रखा गया. सर्जरी के बाद तीसरे दिन ‘अर्ली स्विच-ऑन प्रोटोकॉल’ के तहत इम्प्लांट के साउंड प्रोसेसर को सक्रिय किया गया, जबकि सामान्यतः इसे तीन से चार सप्ताह बाद शुरू किया जाता है. इससे मरीज को जल्द ही ध्वनियों पर प्रतिक्रिया देने में मदद मिली.

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अस्पताल के ‘ईएनटी एवं कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी विभाग’ के निदेशक डॉ. सुमित मृग ने कहा कि इस तरह के ऑपरेशन के बाद मरीज अपने आसपास के वातावरण से फिर से जुड़ने लगते हैं, जिससे मानसिक स्थिति में सुधार हो सकता है. उन्होंने बताया कि वयस्कों में श्रवण हानि अक्सर अवसाद की स्थिति पैदा कर सकती है.