देशभर में चीनी के दाम आसमान छू रहे हैं. महज 17 दिन में चीनी के दामों में 19 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. बढ़ती महंगाई के बीच अब विपक्ष सरकार ने इस मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है. इस बीच आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है. केजरीवाल ने बढ़ते चीनी के दाम पर एक ट्वीट किया है.

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उन्होंने अपने ट्वीट में सरकार को घेरते हुए लिखा, "पूरी की पूरी अनपढ़ों की सरकार है. किसी को कुछ नहीं पता कि क्या करने से क्या होगा." वहीं उन्होंने आगे यह भी लिखा, "तेल आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाने के लिए गन्ने से एथनॉल बनाना शुरू किया. नतीजन चीनी की कमी हो गई. अब उस विदेशी मुद्रा से चीनी आयात करेंगे."

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17 दिन में 19 रुपये महंगी हुई चीनी

चीनी के भाव लगातार बढ़ रहे हैं. महज 17 दिन में चीनी 19 रुपये महंगी हो गई है. अब थोक बाजार में चीनी की कीमत 60 रुपये किलो तक पहुंच गई है. जबकि फुटकर बाजार का भाव 60 रुपये किलो पर है. चीनी की वार्षिक घरेलू खपत 280 लाख टन के करीब है.

31 जुलाई को चीनी को भाव थोक में 44 रुपये किलो जबकि फुटकर में 56 से 46 रुपये किलो बिक रही थी. वहीं 1 अगस्त को थोक का भाव 46 रुपये किलो हुआ और फुटकर का दाम 47 रुपये पहुंच गया. 2 अगस्त को 49 रुपये थोक तो 50 रुपये फुटकर का भाव रहा.

इसके अलावा 6 अगस्त को 54 रुपये थोक और 55 रुपये फुटकर के भाव चीनी बिकी है. वहीं 20 अगस्त को बढ़कर थोक का भाव 60 रुपये किलो और फुटकर का भाव 65 रुपये किलो पहुंच गया है. पूरे देश में चीनी की औसत मिल कीमत 5,400-5,500 रुपये प्रति क्विंटल के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई.

एक साल पहले इतनी थी मिल कीमत

एक साल पहले मिल कीमत 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी, जिससे पता चलता है कि सालाना आधार पर इसमें भारी बढ़ोतरी हुई है.  उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मिल दरों में बढ़ोतरी के साथ ही चीनी की औसत खुदरा कीमत भी 13 प्रतिशत बढ़कर 18 अगस्त को 52.3 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो एक साल पहले 46.34 रुपये प्रति किलोग्राम थी. 

नए 2026-27 सत्र (अक्टूबर-सितंबर) के लिए शुरुआती स्टॉक के 50 लाख टन की घरेलू जरूरत से कम रहने की संभावना है. हालांकि, सरकार ने अभी तक इस आंकड़े को अंतिम रूप नहीं दिया है. अनुमानों में काफी अंतर है.

उद्योग का एक वर्ग पहले का बचा स्टॉक को 40-42 लाख टन मानता है, जबकि शोधकर्ता इसे कम, यानी 32-35 लाख टन बताते हैं जो नए सत्र की शुरुआत में आपूर्ति की तंगी की स्थिति की ओर इशारा करता है.

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