Delhi News: दिल्ली पुलिस आयुक्त के निर्देश पर बाहरी जिला पुलिस ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर सात लोगों को हिरासत में लिया है. इन सभी के पास वैध दस्तावेज नहीं थे और अब इनके खिलाफ विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) द्वारा उसे देशांतरण यानी वापस उनके देश भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है.

यह कार्रवाई अवैध प्रवास को रोकने और राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है.

अवैध प्रवास के खिलाफ कड़ा रुख

दिल्ली में अवैध प्रवासियों, खासकर बांग्लादेशी नागरिकों की बढ़ती मौजूदगी को लेकर चिंताएं बढ़ रही थीं. इसे देखते हुए बाहरी जिला पुलिस ने अवैध प्रवास के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. इस साल अब तक पुलिस ने लगभग 1500 लोगों की जांच की और चार लोगों को हिरासत में लिया था.

अब ताजा कार्रवाई में सात और अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को पकड़ा गया है. इसके लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाई गई है, जो खुफिया जानकारी जुटाने, संदिग्धों की पहचान करने और उन्हें वापस उनके देश भेजने का काम कर रही है. यह अभियान न केवल अवैध प्रवास को रोकने के लिए है, बल्कि इससे जुड़ी गैरकानूनी गतिविधियों पर भी नकेल कसने का प्रयास है.

गिरफ्तार लोगों की पहचान सोहाग, मोहम्मद शाएद उल्लाह कौहार भुइया, मोहम्मद साजिब हसन, लिटन मलिक, मोहम्मद मिजानपुर रहमान, मोहम्मद जकारिया, और बिस्वजीत चंद्र बर्मन के रूप में बताई गई है और ये सभी बांग्लादेश के रहने वाले हैं.

टीम द्वारा कैसे हुई कार्रवाई? 

इस अभियान के लिए इंस्पेक्टर सुंदर सिंह (फॉरेनर सेल प्रभारी) की अगुवाई में एक विशेष टीम बनाई गई थी, जिसमें सब-इंस्पेक्टर अनिल कुमार, हेड कांस्टेबल उमेद, हेड कांस्टेबल आशीष और कांस्टेबल सुमेर शामिल थे. इस टीम को एसीपी (ऑपरेशन) नरेंद्र खत्री का मार्गदर्शन प्राप्त था.

हाल ही में सुल्तान पुरी इलाके में संदिग्ध अवैध प्रवासियों की जांच के दौरान पुलिस ने मोहम्मद अफजल नाम के एक व्यक्ति को हिरासत में लिया. पूछताछ में पता चला कि वह बांग्लादेशी नागरिक है. अफजल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस को खबर मिली कि 10 अप्रैल 2025 को पीरागढ़ी कैंप इलाके में कुछ बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रहने के लिए आने वाले हैं. 

सूचना पर तुरंत करवाई, लिया हिरासत में

इस सूचना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक विशेष टीम गठित की और पीरागढ़ी कैंप इलाके में निगरानी शुरू की. पुलिस ने क्षेत्र को घेर लिया और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी. कुछ देर बाद, काली माता मंदिर, मेन रोहतक रोड के पास सात लोग एक साथ इकट्ठा होते दिखे. उनकी हरकतें और व्यवहार खुफिया जानकारी से मेल खा रहे थे. 

जब पुलिस ने उनसे पूछताछ की तो वे अपनी नागरिकता या भारत में मौजूदगी के बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके. उनके पास कोई वैध दस्तावेज भी नहीं थे. इसके बाद सभी सात लोगों को हिरासत में ले लिया गया.

गहन पूछताछ और तलाशी के दौरान उन्होंने कुछ दस्तावेज दिखाए, लेकिन जांच में पाया गया कि ये दस्तावेज पुराने और अवैध थे. इसके बाद यह पुष्टि हुई कि ये सभी बांग्लादेशी नागरिक हैं और बिना अनुमति के भारत में रह रहे थे. पुलिस ने सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कीं और इन सातों को निर्वासन के लिए एफआरआरओ को सौंप दिया है. 

अवैध प्रवास (इंलिग़ल माइग्रेशन) का मकसद 

जांच में पता चला कि बांग्लादेशी नागरिक अक्सर यूरोपीय देशों में वीजा पाने में दिक्कतों का सामना करते हैं, क्योंकि बांग्लादेश में कई यूरोपीय दूतावास नहीं हैं. इस वजह से वे तीसरे देशों के टूरिस्ट वीजा लेते हैं और फिर गैरकानूनी रास्तों से, जिन्हें आमतौर पर "डंकी" रूट कहा जाता है, यूरोप पहुंचने की कोशिश करते हैं. उनका मकसद बेहतर रोजगार और आर्थिक स्थिरता पाना होता है. 

जनता से सहयोग की अपील

पुलिस अब और अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए अभियान तेज कर रही है. डीसीपी सचिन शर्मा ने कहा, “हमारी प्राथमिकता राष्ट्रीय राजधानी को सुरक्षित रखना और अवैध प्रवास को पूरी तरह रोकना है. यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक हम इस समस्या को जड़ से खत्म नहीं कर देते. 

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें. यह अभियान न केवल अवैध प्रवास को रोकने के लिए है, बल्कि दिल्ली को सुरक्षित और अपराधमुक्त बनाने के लिए भी है.

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