छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को जल जीवन मिशन और स्मार्ट मीटर का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा. नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने जल जीवन मिशन में ठेकेदारों के बकाया भुगतान और कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार को घेरा है. इसके अलावा स्मार्ट मीटर को लेकर भी सरकार पर बड़े उद्योगपतियों के हित में काम करने का आरोप लगाया है.
वहीं, इसके जवाब में बीजेपी विधायक सुशांत शुक्ला ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार जल जीवन मिशन में आर्थिक विसंगतियां छोड़कर गई है और मौजूदा सरकार उन्हें दूर कर मोदी की गारंटी के तहत हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है.
नेता प्रतिपक्ष ने क्या आरोप लगाए?
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन के तहत काम करने वाले ठेकेदारों का करीब 2200 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है. उन्होंने दावा किया कि भुगतान नहीं होने के कारण तीन लोगों द्वारा आत्महत्या किए जाने की बात सामने आई है. महंत ने कहा कि पिछली सरकार के समय काम करने वाले ठेकेदारों का पैसा रोका गया है, जिससे पूरे मामले में घोटाले की आशंका है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को विधानसभा में प्रमुखता से उठाया जाएगा.
स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर क्यों घेरा?
स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर भी नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि किसी बड़े उद्योगपति के दबाव में प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं. उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद लोगों के बिजली बिल तीन से चार गुना तक बढ़ रहे हैं, जिससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में आम जनता परेशान है.
वहीं, बीजेपी विधायक सुशांत शुक्ला ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर में यदि कहीं तकनीकी खामियां हैं, तो उन्हें दूर किया जा रहा है, ताकि भविष्य में इसका लाभ आम उपभोक्ताओं को मिले.
बीजेपी ने आरोपों का दिया जवाब
जल जीवन मिशन पर उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार करीब 9000 करोड़ रुपये की आर्थिक विसंगतियां छोड़कर गई है, जिन्हें दूर करने में समय लग रहा है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार मोदी की गारंटी के तहत हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है. जल जीवन मिशन और स्मार्ट मीटर जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के साथ विधानसभा का माहौल गरमाया रहा. आने वाले दिनों में इन दोनों मुद्दों पर सदन में और तीखी बहस होने के आसार हैं.
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