दुर्ग जिले के ऐतिहासिक देव बलौदा-चरोदा शिव मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित मेले में भारी हंगामा और सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन गई. 15 और 16 फरवरी को लगे इस मेले में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक विशेष समुदाय के दुकानदारों पर 'पहचान छिपाकर' व्यापार करने का आरोप लगाया और उन्हें जबरन दुकानें बंद कराकर मेले से बाहर कर दिया.
विवाद की चिंगारी एक गुपचुप (पानी-पुरी) बेचने वाले के ठेले से भड़की. बताया जा रहा है कि ठेले पर बड़े अक्षरों में 'अजीत चाट भंडार' और 'जय माता दी' लिखा हुआ था. जब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने ऑनलाइन पेमेंट के लिए वहां लगा क्यूआर कोड स्कैन किया, तो मोबाइल पर दुकानदार का असली नाम (मुस्लिम नाम) सामने आ गया. इसे देख कार्यकर्ता भड़क गए. उनका आरोप था कि विशेष समुदाय के लोग जानबूझकर हिंदू देवी-देवताओं के नाम का सहारा लेकर अपनी असली पहचान छिपा रहे हैं.
दुकानदारों से अभद्रता और धक्का-मुक्की
इस खुलासे के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पूरे मेला परिसर में 'सघन जांच अभियान' शुरू कर दिया. वे हर दुकान पर जाकर नाम और पहचान पूछने लगे. आरोप है कि इस दौरान कई व्यापारियों के साथ गाली-गलौज और धक्का-मुक्की भी की गई, जिसके वीडियो भी सामने आए हैं. कार्यकर्ताओं ने सख्त लहजे में गैर-हिंदू दुकानदारों को अपना सामान समेटकर तुरंत मेला छोड़ने का फरमान सुना दिया. बजरंग दल कार्यकर्ता डिकेश वर्मा ने कहा कि पहचान छिपाकर और धोखे से व्यापार करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
पुलिस रही मूकदर्शक, निगम ने जब्त किया ठेला
हैरानी की बात यह रही कि जब यह पूरा घटनाक्रम चल रहा था, तब मौके पर सीएसपी छावनी, भिलाई-3 थाना प्रभारी और पर्याप्त पुलिस बल मौजूद था. पुलिस मूकदर्शक बनी स्थिति को देखती रही और कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए कोई ठोस दंडात्मक कदम नहीं उठाया. हालांकि, भिलाई-चरोदा नगर निगम की टीम ने कार्रवाई करते हुए पहचान छिपाने के आरोप में एक दुकानदार का ठेला जब्त कर लिया. इस घटना के बाद मेले की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं.
