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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षाबलों को नक्सल विरोधी मोर्चे पर शुक्रवार को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है. शासन की 'पुना मारगेम' (पुनर्वास से पुनर्जीवन) नीति से प्रभावित होकर कुल 63 माओवादियों ने समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया.

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले इन 63 माओवादियों में से 36 पर कुल 1 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपये का सामूहिक इनाम घोषित था. सरेंडर करने वालों में 18 महिलाएं भी शामिल हैं. ये सभी नक्सली दक्षिण बस्तर, पश्चिम बस्तर, अबूझमाड़ और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय थे.

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मुख्य रूप से सरेंडर करने वाले बड़े कैडर

  • पाकलू उर्फ रैनू (45): डिवीजनल कमेटी सदस्य और कालाहांडी एरिया कमेटी सचिव (इनाम: 8 लाख).
  • मोहन उर्फ संजय (32): पश्चिम बस्तर डिवीजन छात्र संगठन अध्यक्ष (इनाम: 8 लाख).
  • सुमित्रा उर्फ द्रोपती (30): भैरमगढ़ एरिया कमेटी सचिव (इनाम: 8 लाख).
  • हुंगी उर्फ अंकिता (28): मिलिट्री कंपनी नंबर 10 की सदस्य (इनाम: 8 लाख).
  • इनके अलावा सुखराम ताती, पांडू मड़काम और सोमडू कड़ती पर भी 8-8 लाख रुपये का इनाम था.

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी

यह आत्मसमर्पण केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के उप महानिरीक्षक राकेश चौधरी, दंतेवाड़ा एसपी गौरव राय और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ. अधिकारियों ने बताया कि अन्य आत्मसमर्पित कैडरों में से 7 पर 5-5 लाख, 8 पर 2-2 लाख, 11 पर 1-1 लाख और 3 पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था.

तत्काल सहायता और पुनर्वास

सरकार की पुनर्वास नीति के तहत, आत्मसमर्पण करने वाले सभी 63 माओवादियों को 50-50 हजार रुपये की तत्काल सहायता राशि प्रदान की गई है. इसके साथ ही उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कौशल विकास और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा.

2026 का लक्ष्य: नक्सल मुक्त भारत

नक्सलवाद के खिलाफ यह अभियान तेजी पकड़ रहा है. गौरतलब है कि: 7 जनवरी को सुकमा में 26 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था. वर्ष 2025 में राज्य में 1500 से अधिक नक्सलियों ने हथियार छोड़े. केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है. यह बड़ी सफलता दर्शाती है कि सुरक्षाबलों का दबाव और सरकार की कल्याणकारी योजनाएं अब जंगल के अंदर तक असर दिखा रही हैं.