छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के बडेतेवड़ा गांव में एक ग्रामीण के शव को दफनाने को लेकर दो समुदायों के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि मामला हिंसा में बदल गया. गुरुवार (18 दिसंबर) को हुई इस घटना में कई ग्रामीणों के साथ-साथ 20 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए. जिनमें अंतागढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशीष बंछोर भी शामिल हैं. अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया है. गांव में अभी भी तनाव बना हुआ है.

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अधिकारियों के अनुसार, 16 दिसंबर को जिले के आमाबेड़ा पुलिस थाना क्षेत्र के बड़ेतेवड़ा गांव के सरपंच राजमन सलाम ने अपने पिता के शव को गांव में अपनी निजी जमीन पर दफनाया था. सलाम ने ईसाई धर्म अपना लिया था, लेकिन कुछ ग्रामीणों ने ईसाई रीति-रिवाजों के अनुसार दफन किए जाने पर आपत्ति जताई.

क्या है पूरा मामला?

अधिकारियों ने बताया कि बड़ेतेवड़ा गांव के निवासी चमरा राम सलाम की 16 दिसंबर को बीमारी के कारण मौत हो गई थी. बाद में उनके बेटे ने अपनी निजी संपत्ति पर अपने पिता के शव को दफना दिया था. उन्होंने बताया कि कुछ ग्रामीणों ने मौत पर संदेह जताया और शव को बाहर निकालने की मांग करते हुए दफन करने का विरोध किया. उन्होंने आरोप लगाया कि दफन स्थानीय पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार नहीं किया गया था.

उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर कार्य पालिक दंडाधिकारी द्वारा विधिक प्रावधानों के अनुसार शव को बाहर निकालने का आदेश जारी किया गया. पंचनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और उसके बाद आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी.

पत्थरबाजी के दौरान कई संपत्तियों को पहुंचा नुकसान

अधिकारियों ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है. गांव के लोग आमने-सामने आ गए और एक दूसरे पर पत्थरबाजी की. पुलिस द्वारा स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. इस घटना के दौरान कई संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा गया है.

उन्होंने बताया कि घटना में अंतागढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशीष बंछोर समेत 20 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. घायल पुलिसकर्मियों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर उपचार के लिए रेफर कर दिया गया है. अधिकारियों ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है और शांति बहाल करने के प्रयास जारी हैं.

पिता की 15 दिसंबर को इलाज के दौरान हुई थी मौत- राजमन सलाम

वहीं, 17 दिसंबर को जारी एक वीडियो बयान में राजमन सलाम ने कहा कि उनके पिता की 15 दिसंबर की शाम को कांकेर के एक अस्पताल में बीमारी के कारण मौत हो गई थी. अगली सुबह पार्थिव शरीर को गांव लाया गया. जिसके बाद उन्होंने ग्राम पंचायत सदस्यों और गांव के बुजुर्गों को बताया कि उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था.

राजमन सलाम ने कहा कि उन्होंने अनुरोध किया था कि उनके पिता को गांव के पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार दफनाया जाए और उन्हें इसमें शामिल होने की अनुमति दी जाए. जब मुझे अनुमति नहीं मिली तो मैंने अपने करीबी दोस्तों को बुलाया और अपने (ईसाई) रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत चुनाव हारने वालों ने बाहरी लोगों को इकट्ठा किया और शव को कब्र से निकालने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया.

अधिकारियों ने बताया कि गांव में तनाव बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी है. साथ ही इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है.

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