बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने शुक्रवार (11 सितंबर 2026) को दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग की है. उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर रामविलास पासवान की जयंती और पुण्यतिथि पर राजकीय समारोह आयोजित करने का भी आग्रह किया. यह मांग केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने लालू प्रसाद, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान को आदमकद प्रतिमाओं का हकदार बताया था.
तेजस्वी से जब चिराग के बयान और दोनों दलों के अलग-अलग राजनीतिक खेमों में होने के बावजूद इस मांग को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने सामाजिक मुक्ति के लिए काम किया है, उनका सम्मान किया जाएगा. उन्होंने कहा कि बिहार इन नेताओं के योगदान का ऋणी है.
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शरद यादव और रघुवंश प्रसाद का भी किया जिक्र
तेजस्वी ने अपने पत्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव और रघुवंश प्रसाद सिंह को भी सम्मानित करने की मांग की. उन्होंने तीनों दिवंगत नेताओं को ‘राष्ट्रपुत्र’ बताते हुए कहा कि उनके योगदान को सम्मान मिलना चाहिए. रामविलास पासवान और लालू प्रसाद ने 1977 में बिहार आंदोलन के बाद पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया था.
चिराग के बयान पर भाजपा ने जताई आपत्ति
चिराग पासवान के लालू प्रसाद की प्रशंसा करने और उनकी प्रतिमा लगाने की वकालत पर भाजपा ने नाराजगी जताई है. भाजपा विधायक नीरज कुमार सिंह ‘बबलू’ ने कहा कि लालू प्रसाद दोषसिद्ध व्यक्ति हैं, ऐसे में उनकी प्रतिमा कैसे लगाई जा सकती है. इस बयान के बाद एनडीए के भीतर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है.
तीनों नेताओं को बताया प्रतिमा का हकदार
चिराग पासवान ने बख्तियारपुर का नाम नीतीश कुमार के नाम पर रखने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि नीतीश कुमार, लालू प्रसाद और रामविलास पासवान ने बिहार के सार्वजनिक जीवन में बड़ा योगदान दिया है. उन्होंने कहा था कि तीनों नेता आदमकद प्रतिमाओं के हकदार हैं. रामविलास पासवान ने 2000 में लोक जनशक्ति पार्टी की स्थापना की थी. वहीं, शरद यादव और रघुवंश प्रसाद सिंह का भी बिहार की राजनीति में लंबा योगदान रहा.
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