सम्राट चौधरी की सरकार बनने के बाद से लगातार बिहार में ऐक्शन जारी है. अब राज्य में मदरसों की जांच के आदेश दिए गए हैं. सरकार के इस आदेश पर दूसरी ओर सियासत भी रही है. आरजेडी और बीजेपी की ओर से दिए गए बयान के बाद अब लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य की इस पर प्रतिक्रिया आई है.
रोहिणी आचार्य ने मंगलवार (02 जून, 2026) को अपने एक्स हैंडल से पोस्ट किया और इस जांच को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया. उन्होंने लिखा, "मदरसों की जांच का सम्राट सरकार का आदेश स्पष्ट तौर पर एक समुदाय विशेष को कठघरे में खड़े करने जैसा है..."
रोहिणी आचार्य का कहना है कि मदरसों की जांच के नाम पर किसी एक समुदाय के शैक्षणिक संस्थान को निशाना बनाना उचित नहीं है. यदि शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता ही सरकार का उद्देश्य है, तो सरकार को सभी अनुदानित शिक्षण संस्थानों- मदरसों, संस्कृत विद्यालयों और अन्य निजी सहायता प्राप्त स्कूलों की समान रूप से जांच करनी चाहिए.
सम्राट सरकार को दी नसीहत
रोहिणी ने कहा कि शिक्षा सुधार का रास्ता संवाद और संसाधनों के विस्तार से निकलता है, संदेह और चयनात्मक जांच से नहीं. उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि सम्राट सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कार्रवाई किसी विशेष धर्म या समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह का संदेश न दे.
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उन्होंने आगे कहा कि यदि सरकारी अनुदान प्राप्त संस्थानों की जवाबदेही तय करनी है तो सम्राट सरकार को एक समान नीति बनानी चाहिए. केवल मदरसों को केंद्र में रखकर की गई कार्रवाई से सामाजिक सौहार्द और विश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.
पोस्ट के अंत में रोहिणी लिखती हैं, "शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन जांच की आड़ में किसी विशेष समुदाय को कठघरे में खड़ा करना कतई उचित नहीं. सरकारी आदेश में पारदर्शिता होनी चाहिए, इसके लिए नियम सब पर समान रूप से लागू होना चाहिए, न कि चुनिंदा संस्थानों पर…"
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