आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को दो दिन के लिए बंद किए जाने पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध प्रदर्शनों को रोकने की कोशिश कर रही है. उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए 1974 के आपातकाल जैसे हालात से तुलना की. इसके साथ ही उन्होंने वकील प्रशांत भूषण के ‘रिजीम चेंज’ वाले बयान पर भी अपनी बात रखी.

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सुधाकर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार दिल्ली को बंद करने के मूड में है. सरकार के पास अब बचाव के रास्ते नहीं बचे हैं. उन्होंने मतदाता सूची और वोट चोरी से जुड़े आरोपों का जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि इन आरोपों के सबूत देश के सामने हैं.

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प्रदर्शन और रैली पर रोक को लेकर उठाए सवाल

आरजेडी सांसद ने कहा कि कभी जंतर-मंतर, कभी कनॉट प्लेस और कभी मार्च या रैली पर रोक लगाई जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के जरिए जन आंदोलनों को दबाने की कोशिश हो रही है. उन्होंने इसकी तुलना 1974 के आंदोलन के दौर से की. इस संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व पर भी निशाना साधा.

‘रिजीम चेंज’ बयान पर भी रखी राय

प्रशांत भूषण के ‘रिजीम चेंज’ वाले बयान पर सुधाकर सिंह ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में लोकतांत्रिक अभियान चल रहे हैं. उन्होंने बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव के जरिए सत्ता पर कब्जे और कॉरपोरेट प्रभाव को लेकर बहस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है. उन्होंने दावा किया कि कॉरपोरेट समर्थक सरकारों के खिलाफ अभियान चल रहे हैं.

व्यवस्था में बड़े बदलाव का दावा

सुधाकर सिंह ने कहा कि भारत ने लोकतंत्र के सिद्धांतों को तय करने में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत में भी इस तरह के अभियान का असर दिखाई देगा. उन्होंने कहा कि बदलाव केवल सत्ता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यवस्था में भी आमूलचूल परिवर्तन होगा.

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