बिहार विधानमंडल का बजट सत्र चल रहा है. विधान परिषद में आरजेडी के एमएलसी सुनील सिंह और मंत्री अशोक चौधरी में इन दिनों खूब बहस भी हुई है. अशोक चौधरी ने बीते गुरुवार को अपने एक बयान में दलितों को अपमानित करने की बात कही थी. आज (शुक्रवार) उस पर आरजेडी के एमएलसी सुनील सिंह ने बड़ा हमला किया. पलटवार करते हुए कहा कि अशोक चौधरी दलित नहीं हैं क्योंकि दलितों के पास अरबों रुपया नहीं होता.
पत्रकारों ने सवाल किया कि अशोक चौधरी का कहना है कि आप (सुनील सिंह) उनको इसीलिए टारगेट कर रहे हैं क्योंकि बिस्कोमान से आपको हटाने में उनकी भूमिका रही है. इस पर जवाब में सुनील सिंह ने कहा कि जो बात बाजार में लोग कयास लगा रहे थे उन्होंने (अशोक चौधरी) अब खुद बता दी कि उन्होंने तीन आदमी को तोड़ने के लिए 5-5 करोड़ रुपया अपने घर से दिया था. सभी लोग जानते हैं.
'प्रोफेसर बन गए, क्या पढ़ाएंगे…'
सुनील सिंह ने कहा, "बिस्कोमान के चुनाव में मैं नहीं लड़ रहा था. दो टर्म मेरा हो गया था, इसलिए नहीं लड़ सकता था. बिस्कोमान का चुनाव हुआ तो मेरे पैनल के 11 लोग जीते थे… उनके पैनल के छह लोग जीते थे, इनकी (अशोक चौधरी) क्या हैसियत है कि हराएंगे-जिताएंगे. इन्होंने अपने दामाद को फर्जी तरीके से मुजफ्फरपुर से प्रतिनिधि बनाकर लाया था कि मेरा दामाद अध्यक्ष बन जाए. ये लोग फर्जी तरीके से काम करते हैं. दलित-गरीब का हक मारकर ये प्रोफेसर बन गए. प्रोफेसर तो बन गए लेकिन क्या पढ़ाएंगे कि भ्रष्टाचार से कैसे अकूत संपत्ति बनाई जाती है?"
'मेरे दिल में सम्मान, लेकिन...'
सुनील सिंह ने अशोक चौधरी को अपना बड़ा भाई बताया. कहा कि सीनियर मंत्री हैं, मेरे दिल में उनके लिए सम्मान है, लेकिन इस तरह (जैसा सदन में अशोक चौधरी ने कहा) की भाषा ठीक नहीं है. जिस तरह से उन्होंने सदन में कहा वो कहीं से दलित नहीं हैं. दलित के पास अरबों रुपया नहीं होता है. प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया था सबूत के साथ कि उन्होंने (अशोक चौधरी) अरबों रुपया कमाया.
आगे कहा, "हमने 1980 में मैट्रिक किया, बीएससी, एमएससी किया. आप (अशोक) हमको देहाती कहते हैं, आज भी बिहार की 80 प्रतिशत जनता गांव में बसती है. वो कहते हैं कि हम गंवार हैं. भाई जो गांव का आदमी रहेगा वो आपके जितना थोड़ी बुद्धिमान हो जाएगा."
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