Bihar Budget: नीतीश सरकार की ओर से इस साल 3 लाख 17 हजार करोड़ का बजट पेश किया गया, जिसमें बिहार के विकास को लेकर कई घोषणाएं की गईं हैं. बजट को लेकर बिहार के मुखिया नीतीश कुमार ने जहां सम्राट चोधरी की पीठ थपथपाई वहीं सदन के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस बजट को सरकारी पन्नों पर झूठ और जुमलों की स्याही से पढ़ा गया भाषण करार दिया.
'मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे लोग'
उन्होंने कहा, जमीनी सच्चाई यह है कि बिहार आधुनिक सुविधाएं तो छोड़िए अब भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है. सरकार राजस्व सृजन कर नहीं पा रही है लेकिन बजट को बढ़ा दे रही है. इन्हें कुर्सी और सरकार बचाने की चिंता है लेकिन हमें बिहार बचाने और बनाने की चिंता है.
फ़्री का ऐलान नहीं करने पर तेजस्वी
तेजस्वी यादव ने कहा कि "बीजेपी के लोगों को बिहार से घृणा है, नफ़रत करते हैं ये. बिहार के लोगों के साथ देखिए कैसा व्यवहार है. बताएं कि गुजरात को क्या-क्या दिया और बिहार को क्यों नहीं" पलायन, बेरोजगारी और गरीबी जो सबसे ज़्यादा बिहार में है. उस पर चर्चा नहीं हुई.
फ़ूड प्रोसेसिंग कैसे करेंगे. कारख़ाने कैसे लगाएंगे. IT पॉलिसी और जो हमारी सरकार में हुआ वही ज़िक्र है. नया कुछ नहीं. हमने तर्क दिया था कि 65% महिलाएं खून की कमी का शिकार हैं. उस पर कुछ नहीं कहा. 200 यूनिट बिजली फ़्री हमने कहा था करने को वो भी नहीं हुआ.
तीन लाख सत्रह हज़ार करोड़ का बजट है, सरकार को रेवन्यू नहीं आ रहा तो तीन लाख सत्रह हज़ार करोड़ इन्फ्लेटेड है. बढ़ा चढ़ा कर कहना था तो पांच लाख करोड़ दे देते. केंद्र ने बिहार के साथ सौतेला व्यवहार किया. साक्षरता के मामले में बिहार फिसड्डी है. कहीं भी फैक्ट्री लगाने, रोज़गार की बात नहीं की गई.
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