बांकीपुर उपचुनाव में हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) बिहार ने प्रदेश संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए राज्य की सभी संगठनात्मक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है. पार्टी की ओर से गुरुवार (06 अगस्त, 2026) को जारी कार्यालय आदेश में यह जानकारी दी गई. इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश के सभी स्तरों पर संगठन के पुनर्गठन की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी.
आरजेडी बिहार के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल की ओर से आदेश जारी हुई है. यह निर्णय पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव से हुए परामर्श के बाद लिया गया है.
आदेश में क्या कुछ कहा गया?
आदेश में कहा गया है कि आरजेडी बिहार के पूर्व में जारी कार्यालय आदेश को निरस्त करते हुए राज्य की सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग किया जाता है. कार्यालय आदेश के मुताबिक प्रदेश स्तर से लेकर जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक की सभी संगठनात्मक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है. इसके अलावा पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों से संबंधित संगठनात्मक इकाइयों तथा अन्य संबद्ध संगठनात्मक इकाइयों को भी भंग करने का निर्णय लिया गया है.
यह भी पढ़ें- बिहार: खतरे में विधायकों के PA-PS की नौकरी? CM सम्राट का बड़ा फरमान
इसमें यह भी कहा गया है कि प्रदेश के सभी स्तरों की स्थानापन्न समितियों के पुनर्गठन की कार्रवाई शीघ्र प्रारंभ की जाएगी. माना जा रहा है कि आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संगठन को नई मजबूती देने की रणनीति के तहत यह कदम उठाया गया है.
नए सिरे से होगा संगठन का विस्तार?
पार्टी नए सिरे से संगठन का विस्तार करने और विभिन्न स्तरों पर नई जिम्मेदारियां तय करने की तैयारी में जुट गई है. संगठनात्मक ढांचे को भंग कर पुनर्गठन का फैसला पार्टी संगठन को अधिक सक्रिय एवं प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर पर नए पदाधिकारियों की नियुक्ति का रास्ता साफ होगा तथा पार्टी को जमीनी स्तर पर नए सिरे से संगठित करने का अवसर मिलेगा.
आरजेडी के इस फैसले के बाद अब पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की निगाहें संगठन के पुनर्गठन पर टिकी हैं. उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में प्रदेश से लेकर पंचायत स्तर तक नई समितियों की घोषणा की जाएगी और संगठन को नए स्वरूप में सक्रिय किया जाएगा.
यह भी पढ़ें- भरत तिवारी का परिवार प्रशांत किशोर पर करेगा केस? 50 लाख का मामला
