बिहार के नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड में सकरी नदी ग्रामीणों के लिए रोज मौत का खतरा बन चुकी है. पिपरा, डेलुआ, मुहावरा और शेखूपुर जैसे गांवों के लोग बाजार और रोजगार के लिए नदी पार करने को मजबूर हैं. बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद हालात और खतरनाक हो जाते हैं, लेकिन मजबूरी में बच्चे, बुजुर्ग और बाइक चालक तक तेज बहाव के बीच नदी पार करते हैं.

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ग्रामीणों का कहना है कि गांव के आसपास बाजार की सुविधा नहीं है. रोजमर्रा की जरूरतों और रोजगार के लिए गोविंदपुर बाजार जाना पड़ता है. लंबा वैकल्पिक रास्ता होने और ज्यादा खर्च के कारण लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार करने का रास्ता चुनते हैं.

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बाइक समेत पानी में उतरते हैं लोग, पहले भी हो चुके हैं हादसे

स्थानीय लोगों के मुताबिक सकरी नदी में पानी बढ़ने के बाद बहाव काफी तेज हो जाता है. झारखंड की ओर से आने वाला पानी नदी के प्रवाह को और खतरनाक बना देता है. इसके बावजूद लोग बाइक समेत नदी पार करते दिखाई देते हैं.

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला. लोगों को डर है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. उनका कहना है कि दुर्घटना के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी.

महावरा घाट पर बन रहा 600 मीटर पुल, 2028 तक पूरा होने की उम्मीद

गोविंदपुर प्रखंड के महावरा घाट पर सकरी नदी के ऊपर 600 मीटर लंबे पुल का निर्माण कराया जा रहा है. इस परियोजना की लागत करीब 54 करोड़ रुपये बताई जा रही है. पुल निर्माण का काम अक्टूबर 2025 में शुरू हुआ था और इसके वर्ष 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है.

हालांकि, ग्रामीणों की परेशानी यह है कि यह पुल उनके गांवों से करीब तीन किलोमीटर दूर बनेगा. वहीं दूसरा रास्ता झारखंड होकर जाता है, जिसमें प्रति व्यक्ति करीब 200 रुपये खर्च हो जाते हैं. ऐसे में रोजाना आने-जाने वाले लोगों के लिए यह रास्ता महंगा साबित होता है.

पांच से छह हजार आबादी की जिंदगी दांव पर, प्रशासन से तत्काल सुरक्षा की मांग

पिपरा, डेलुआ, मुहावरा और शेखूपुर समेत आसपास के गांवों की आबादी करीब पांच से छह हजार है. बड़ी संख्या में लोग सब्जी बेचने और बाजार के काम से रोज नदी पार करते हैं. ग्रामीणों की मांग है कि पुल बनने तक प्रशासन अस्थायी व्यवस्था करे. नदी पार करने वाले स्थानों पर सुरक्षा इंतजाम, नाव की सुविधा या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि किसी अनहोनी को रोका जा सके. फिलहाल सकरी नदी का यह रास्ता हजारों लोगों के लिए मजबूरी और खतरे का सफर बना हुआ है.

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