बिहार की राजनीति में पुलिस प्रशासन और कानून-व्यवस्था को लेकर विवाद बढ़ गया है. बक्सर से RJD सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार पुलिस के DG कुंदन कृष्णन पर आय से अधिक संपत्ति और बेनामी जमीन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. मंगलवार (03 नवंबर, 2026) को उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की. सांसद ने दावा किया कि उनके पास वार्षिक संपत्ति विवरण और बिहार भूमि पोर्टल से जुड़े दस्तावेज हैं.

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कुंदन कृष्णन ने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर और सांसद के बयानों को लेकर सुधाकर सिंह को 5 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा था. उनसे सार्वजनिक माफी मांगने को कहा गया था. सांसद ने माफी मांगने से इनकार कर दिया. उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सवाल उठाया कि क्या किसी अधिकारी को ऐसा नोटिस भेजने से पहले सरकार की अनुमति मिली थी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले का संज्ञान लेकर नोटिस की जांच के आदेश दिए हैं.

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100 करोड़ से अधिक की संपत्ति का दावा

सुधाकर सिंह ने दावा किया कि कुंदन कृष्णन और उनके परिवार के वार्षिक संपत्ति विवरण में 100 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियों का जिक्र है. इनमें नालंदा के बिंद और दरियापुर की कृषि भूमि, पटना के नाला रोड स्थित मकान और गुरुग्राम का फ्लैट शामिल हैं. सांसद ने इन संपत्तियों के घोषित मूल्य और मौजूदा बाजार मूल्य में अंतर होने का सवाल उठाया है. उन्होंने खरीद में इस्तेमाल धन के स्रोत की जांच की मांग की.

ट्रांसपोर्ट नगर और पत्नी के नाम जमीन पर सवाल

सांसद ने पटना के ट्रांसपोर्ट नगर में 14.0624 डिसमिल जमीन का जिक्र किया. सांसद के मुताबिक, इसका सरकारी मूल्य करीब 91 लाख रुपये और बाजार मूल्य करीब 7 करोड़ रुपये है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस जमीन का जिक्र संपत्ति विवरण में नहीं है. इसके अलावा नालंदा के बिंद गांव में 4.125 डिसमिल जमीन और कैमूर के भगवानपुर में कई भूखंडों का भी जिक्र किया.

सुधाकर सिंह ने कुंदन कृष्णन की पत्नी डॉ. मल्लिका सिंह के नाम पर पटना के बैरिया और सिमली मुरारपुर में जमीन होने की बात कही. उन्होंने रितेश रंजन सिंह उर्फ बिट्टू सिंह के साथ जमीन के लेन-देन और भारती इंफ्राटेल को जमीन लीज पर देने के मामले की जांच की मांग की.

स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग

सांसद ने नकद, सोना और कीमती रत्नों को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि संपत्तियों की रजिस्ट्री, जमाबंदी, दाखिल-खारिज और भुगतान के स्रोत की जांच होनी चाहिए. परिवार के नाम पर खरीदी गई जमीन के वास्तविक मालिक और धन के स्रोत का पता लगाने की मांग भी की.

सुधाकर सिंह ने कहा कि वह इस मामले को पटना हाईकोर्ट और केंद्र सरकार तक ले जाएंगे. उन्होंने साफ किया कि 5 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस उन्हें डराने वाला नहीं है. उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ अधिकारी की संपत्ति से जुड़े सवालों का जवाब दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच के जरिए दिया जाना चाहिए.

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