बिहार के सीएम नीतीश कुमार को 30 मार्च तक विधान परिषद के सदस्य के तौर पर इस्तीफा देना होगा. 10 अप्रैल से राज्यसभा सदस्य के तौर पर कार्यकाल शुरू होगाबतौर राज्यसभा सदस्य भी नीतीश कुमार सीएम रह सकते हैं. संविधान के मुताबिक, राज्य के किसी सदन का सदस्य नहीं रहे बिना भी कोई नेता छह महीने तक सीएम पद पर बना रह सकता है. छह महीने के भीतर उसे राज्य के किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है.

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30 मार्च तक नीतीश कुमार को देना होगा इस्तीफा

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए 16 मार्च 2026 को मतदान हुआ था और उसके बाद उसी दिन नतीजे घोषित किए गए थे. नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा का चुनाव जीते थे. नियम के अनुसार 14 दिनों के भीतर यानी 30 मार्च तक MLC पद से इस्तीफा देना होगा. राज्यसभा की पांचों सीटों पर एनडीए के उम्मीदवारों की जीत मिली थी.

चाहें तो सितंबर तक CM रह सकते हैं नीतीश कुमार

इसका अर्थ ये है कि MLC पद से हटने के बाद भी नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री के तौर पर बने रहने में भी कोई तकनीकी समस्या नहीं है. नीतीश कुमार के पास सितंबर 2026 तक का समय है और चाहें तो उस वक्त तक सीएम की कुर्सी पर बने रह सकते हैं. वो ऐसा करेंगे या नहीं ये देखने वाली बात होगी. हालांकि, इन्हीं नियमों का हवाला देते हुए कुछ जेडीयू नेताओं ने संकेत दिया कि बिहार में सत्ता परिवर्तन को टाला जा सकता है. यानी कि नई सरकार के गठन में देर हो सकती है.

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नई सरकार का नेतृत्व कौन करेगा इस पर भी अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है. सूत्रों का कहना है कि नए सीएम को चुने जाने की प्रक्रिया में नीतीश कुमार की 'पसंद' का खयाल रखा जाएगा. दिलचस्प है कि समृद्धि यात्रा के दौरान नीतीश कुमार ने कई मंच से बिहार के मौजूदा गृहमंत्री और बीजेपी नेता सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर बड़े सियासी संकेत दिए. उन्होंने यहां तक कह दिया कि आगे काम यही देखेंगे.