बिहार में लागू शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर बयानबाजी शुरू हो गई है. एनडीए में शामिल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के संरक्षक जीतन राम मांझी ने फिर से बयान दिया है कि इसकी समीक्षा होनी चाहिए और गुजरात मॉडल के तौर पर शराबबंदी कानून को लागू करने पर सरकार को विचार करना चाहिए. इस पर अब जेडीयू का रिएक्शन आया है.
सोमवार (10 अगस्त, 2026) को जेडीयू कोटे के मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि जीतन राम मांझी की यह व्यक्तिगत राय हो सकती है. बिहार में 2016 से पूर्ण शराबबंदी है. गिरफ्तारी हो या ट्रायल हो इस पर लगातार पुलिस और मद्य निषेध विभाग की ओर से कार्रवाई की जा रही है. तत्काल जो कानून है जिसे दोनों सदनों से पास किया गया है वो जारी है.
शीला मंडल ने भी कहा यह मांझी की व्यक्तिगत राय
वहीं जीतन राम मांझी के शराबबंदी वाले बयान पर जेडीयू कोटे की मंत्री शीला मंडल ने कहा, "जीतन मांझी हमारे एनडीए गठबंधन के वरिष्ठ नेता हैं. हम उनकी बात नहीं सुने हैं कि वह क्या बोले हैं. उस पर प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है. यह उनकी व्यक्तिगत राय हो सकती है…"
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बता दें कि सरकार में शामिल रहने के बावजूद बिहार में शराबबंदी को लेकर पहले भी जब नीतीश कुमार सरकार थी तो कई बार मांझी समीक्षा की बात कह चुके हैं. हलांकि कई बार समीक्षा हुई भी है. अब सम्राट सरकार में भी जीतन राम मांझी ने गुजरात मॉडल की तरह तरह शराबबंदी लागू करने की मांग फिर से उठाई है.
बीते रविवार (10 अगस्त, 2026) को हम पार्टी के युवा प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मांझी ने शराबबंदी पर सरकार को निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को और मजबूत करने की बात उठाई थी ताकि अधिकारी शराबबंदी कानून का दुरुपयोग न कर सकें.
उन्होंने कहा था कि गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों पर कार्रवाई अधिक होती है जबकि प्रभावशाली लोग कानून से बच निकलते हैं. हालांकि, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्य में लागू पूर्ण शराबबंदी नीति वापस नहीं ली जाएगी.
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