पटना के मसौढ़ी प्रखंड में डॉग बाबू का आवासीय प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है. इस मामले में डीएम  डॉ. त्यागराजन एसएम के सख्त निर्देश के बाद डॉग बाबू का निवास प्रमाण पत्र रद्द कर दिया है. साथ ही आवेदक, कंप्यूटर ऑपरेटर और जारीकर्ता राजस्व अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. 

पटना प्रशासन की उड़ गई थी नींद

दरअसल 'डॉग बाबू' का मामला सामने आने के बाद पटना प्रशासन की नींद उड़ गई थी. प्रशासन ने मसौढ़ी अंचल में डॉग बाबू के नाम से बने इस निवास प्रमाण पत्र को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया और मामले में जांच के आदेश दिए गए. ताकि ये बात साफ हो सके कि आखिर किसकी गलती की वजह से इतनी बड़ी लापरवाही हुई. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में कितनी पारदर्शिता बरती जाएगी और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल आईटी सहायक को तत्काल प्रभाव से सेवामुक्त कर दिया गया है, जिसने गलत दस्तावेजों की जांच किए बगैर आरओ लॉगिन पर आवेदन स्वीकृति के लिए आगे बढ़ा दिया. 

वहीं मसौढ़ी अनुमंडल पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट के आने के बाद नियम के विरूद्ध शपथ-पत्र देकर और किसी अन्य व्यक्ति के पहचान पत्र का दुरूपयोग कर गलत साक्ष्य के आधार पर निवास प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन देने वाले आवेदक के विरूद्ध पुलिस जांच की जा रही है. ऐसे प्रकरण का अंजाम देने वाले लोगों के विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी.

बता दें कि मसौढ़ी के आरटीपीएस (लोक सेवा का अधिकार) काउंटर से 24 जुलाई 2025 को जारी इस प्रमाण पत्र (संख्या BRCCO/2025/15933581) पर राजस्व कर्मचारी मुरारी चौहान के डिजिटल हस्ताक्षर थे. शुरुआती जांच में पता चला कि यह प्रमाण पत्र दिल्ली की एक महिला के दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करके बनाया गया था. मसौढ़ी के अंचल अधिकारी प्रभात रंजन ने प्रमाण पत्र रद्द होने की पुष्टि करते हुए बताया कि दोषी कर्मियों के खिलाफ साइबर धोखाधड़ी और सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है.

पप्पू यादव के ट्वीट ने मचाई थी हलचल

दरअसल यह मामला सोमवार को तब सुर्खियों में आया जब पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तंज कसते हुए लिखा, "कुत्ता निवास प्रमाण पत्र दिखा रहा है, कोई इंसान प्रमाण पत्र नहीं दे पाया... ये है मेरा भारत महान. मुख्य चुनाव आयुक्त महोदय, गांजा पीकर कहां सो रहे हैं?" उनके इस बयान से बिहार में चल रहे विशेष मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं."

ये भी पढ़ें: 'सत्ता में नहीं हैं तब तो यह हाल है', भाई वीरेंद्र के जूता मारने वाले वायरल ऑडियो पर JDU-BJP का हमला