यूजीसी के नए नियमों पर गुरुवार (29 जनवरी, 2026) को सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी. इसके बाद तमाम दल के नेता अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. बीजेपी के राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि मुझे ऐसा लग रहा था कि जो कुछ खामियां इस नोटिफिकेशन में थीं तो लगता था कि कोर्ट का हस्तक्षेप लाजमी है और होना चाहिए, वैसा हुआ. अब सरकार को मौका मिलेगा, यूजीसी को मौका मिलेगा. 

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मनन मिश्रा ने कहा, "हमारे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहले ही कहा था कि किसी के साथ अन्याय और भेदभाव नहीं होगा, तो अब सरकार को पूरा मौका मिला है. अपना पक्ष रखेगी. कुछ कमियां हैं तो दूर करेगी." कोर्ट से भेजे गए नोटिस पर कहा, "निश्चित तौर पर… दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट कोई फैसला करती है."

'शिकायत करो और जिंदगी खराब कर दो'

बता दें कि यूजीसी के नए नियमों का मनन मिश्रा ने विरोध किया था. उन्होंने कहा था, "रैगिंग के खिलाफ सख्त कानून है. नए रेगुलेशन के बाद शैक्षणिक संस्थान विवादों का अड्डा बन जाएंगे. छात्र किसी भी जाति के हों, वे वहां पढ़ने आए हैं और उन्हें यह छूट दी गई है कि कुछ भी हो, अगर छोटी-मोटी लड़ाई भी हो तो शिकायत करो और किसी की जिंदगी खराब कर दो."

सभी को मंजूर होना चाहिए कोर्ट का फैसला: अरुण भारती

उधर सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC के नए नियमों पर रोक लगाने पर LJP (रामविलास) सांसद अरुण भारती ने कहा, "अलग-अलग पक्षों की चिंता सामने आ रही थी. कोर्ट में जाने का मतलब है कि सभी पक्षकारों, हितधारकों से बात की जाएगी, सभी पक्षों को सुना जाएगा और इसके बाद कोर्ट जो फैसला लेगी वो संविधान सम्मत फैसला लेगी. कोर्ट जो भी फैसला लेगी सभी को मंजूर होना चाहिए."

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