यूजीसी के नए नियम को लेकर दायर याचिका पर गुरुवार (29 जनवरी, 2026) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस बीच राहत वाली खबर यह आई कि यूजीसी के नए नियम पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. अभी 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे. अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी. इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का रिएक्शन आया है.

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जेडीयू नेता और पार्टी के प्रवक्ता अरविंद निषाद ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने 19 मार्च 2026 तक यूजीसी के नए नियम पर रोक लगा दी है और भारत सरकार से इसमें स्पष्टीकरण की मांग की गई है. भारत सरकार की ओर से स्पष्टीकरण के बाद इस पर कोई भी प्रतिक्रिया देना उचित होगा. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाते हुए गाइडलाइन… सुझाव देने का निर्देश भारत सरकार को दिया है." जेडीयू ने इस तरह का रिएक्शन देकर यह साफ कर दिया है कि पार्टी अभी खुलकर बोलने से बचना चाह रही है.

राष्ट्रव्यापी हड़ताल की हो रही थी तैयारी

बता दें कि यूजीसी के नए नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए लाए गए थे, लेकिन सवर्ण पक्ष का आरोप था कि ये सामान्य वर्ग के छात्रों-शिक्षकों के साथ भेदभाव करते हैं, केवल SC/ST/OBC को संरक्षण देते हैं और संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) का उल्लंघन करते हैं. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. कोर्ट के इस फैसले से पहले एक फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की तैयारी की जा रही थी.

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बिहार के नवादा में दिखा खुशी का माहौल

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उधर बिहार के नवादा में सवर्ण समाज के लोग एक-दूसरे को गुलाल-लगाकर बधाई देते दिखे. लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का आभार जताया और कहा, "यह फैसला बच्चों के भविष्य और समान अवसरों की रक्षा करता है." स्थानीय स्तर पर जश्न का माहौल है.

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