बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज (16 फरवरी) विधानसभा परिसर में सियासी माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ नजर आया. राजद के विधायक हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर धरना-प्रदर्शन करते दिखे. प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार और बीजेपी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई.

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राजद विधायक यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों को लागू करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि ये नियम शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करेंगे और सामाजिक न्याय की दिशा में एक जरूरी कदम हैं. इसके साथ ही विधायकों ने आरक्षण के मुद्दे को लेकर भी सरकार पर सीधा हमला बोला.

65% नहीं अब 85% आरक्षण लेकर रहेंगे- राजद

जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान राजद विधायकों ने नारा लगाया कि 65% नहीं अब 85% आरक्षण लेकर रहेंगे. उन्होंने केंद्र सरकार और बिहार की मौजूदा सरकार को 'आरक्षण विरोधी' बताते हुए आरोप लगाया कि पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों के अधिकारों को लगातार कमजोर किया जा रहा है.

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बीजेपी ने कोर्ट में फंसा दिया फैसला- राजद

विधायकों का कहना है कि महागठबंधन सरकार के समय जातीय गणना कराई गई थी और यह फैसला राजद की पहल पर हुआ था. उसी जातीय गणना के आधार पर बिहार में आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 65 प्रतिशत किया गया था. लेकिन राजद नेताओं का आरोप है कि बीजेपी ने इस फैसले को कोर्ट में फंसा दिया. जिससे यह व्यवस्था रद्द हो गई.

हम लड़ रहे सामाजिक न्याय की लड़ाई- राजद

राजद विधायकों ने साफ कहा कि यह सिर्फ कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय की लड़ाई है. विधायकों का कहना है कि महागठबंधन सरकार में जातीय गणना राजद के कारण हुई और आरक्षण का दायरा 65 % किया गया था जिसको बीजेपी ने कोर्ट में फंसाकर रद्द करा दिया. आरोप लगा रहे BJP ने कोर्ट में मामला फंसाया है. अब 65 की जगह 85 पर्सेंट आरक्षण लेकर रहेंगे की बात कह रहे है.

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