बिहार में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. जदयू के राष्ट्रीय महासचिव और विधायक श्याम रजक ने कहा कि पार्टी का पहले से रुख स्पष्ट रहा है कि बिहार में UCC लागू नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष बीएस चौहान को पत्र लिखकर UCC को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी. नीतीश कुमार की उस समय की राय उनके लिए “गीता समान” है.

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रजक ने कहा कि जदयू का पहले भी यही रुख था. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी अब UCC के प्रस्तावित प्रारूप को देखेगी और उसके प्रावधानों के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों समेत सभी धर्मों के लोगों की राय लेने के बाद ही इस तरह के कानून पर निर्णय होना चाहिए. उनके मुताबिक, बिना व्यापक सहमति के कदम उठाने से सामाजिक वैमनस्य की स्थिति बन सकती है.

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सभी धर्मों के अधिकारों का दिया हवाला

जदयू नेता ने कहा कि देश में अलग-अलग धर्मों के लोगों को अपने धार्मिक अधिकार मिले हुए हैं. उन्होंने UCC के प्रावधानों पर व्यापक चर्चा और संबंधित समुदायों से राय लेने की जरूरत बताई. जदयू का यह रुख ऐसे समय आया है जब केंद्र की ओर से NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने को लेकर चर्चा तेज हुई है.

RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने दिया ऑफर

इसी मुद्दे पर RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने जदयू और नीतीश कुमार को भाजपा से अलग होकर राजद के साथ सरकार बनाने का प्रस्ताव दिया. उन्होंने कहा कि समाजवादी विचारधारा वाले दलों को साथ आना चाहिए. उन्होंने UCC को लेकर बिहार में विरोध जारी रखने की बात कही.

श्याम रजक ने RJD के ऑफर को ठुकराया

हालांकि श्याम रजक ने राजद के इस प्रस्ताव पर साथ जाने से इनकार किया. दूसरी ओर, जदयू के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा है कि पार्टी UCC के प्रावधानों को देखने के बाद ही अंतिम रुख तय करेगी. ऐसे में श्याम रजक के बयान और पार्टी के अन्य नेताओं के हालिया बयानों के बीच UCC पर जदयू की अंतिम स्थिति को लेकर चर्चा जारी है.

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