केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी एमडीआर चार्ज लगाने के आदेश के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है.  गिरिराज सिंह ने उन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि 'पागल आदमी है, इसको अमेरिका का भूत है.'

Continues below advertisement

केंद्रीय मंत्री ने यूसीसी को लेकर अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि इसमें कम्युनल कॉन्सपिरेसी कैसे हो गई. उन्होंने कहा कि देश का बंटवारा किस आधार पर हुआ था और नेहरू जी ने तुष्टिकरण के चलते भारत में मुसलमानों को शरिया कानून मानने की अनुमति दी तथा मस्जिदों को अलग स्टेटस दिया. UCC पर जदयू के रुख को लेकर सिंह ने कहा कि जबरदस्ती कुछ भी नहीं होगा. बातचीत होगी और उसके आधार पर चीजें आगे बढ़ेंगी.

पप्पू यादव का सरकार पर हमला, बोले- मैं 500 दे सकता हूं तो सरकार क्या कर रही?

Continues below advertisement

'मुल्लाओं के आगे झुक गए थे राजीव गांधी'

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर गिरिराज सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता कहां खत्म हो गई, अगर हत्या, चोरी या दूसरे अपराधों में शरिया कानून नहीं माना जाता तो हर मामले में अलग कानून की मांग क्यों.

उन्होंने शाहबानो मामले का जिक्र करते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी मुल्लाओं के सामने झुक गए थे, लेकिन “ये मोदी सरकार है, झुकेगी नहीं”, देश में एक देश, एक कानून रहेगा. जेडीयू के रुख पर उन्होंने कहा कि बातचीत होगी, जबरदस्ती नहीं होगी. 

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

UPI संबंधी सरकार के फैसले पर राहुल गांधी ने कहा था कि - मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है. अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है. इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है. सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी. लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से.

कांग्रेस नेता ने दावा किया था कि अमेरिकी payment कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं. अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है. US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं.