राजधानी पटना के कंकड़बाग इलाके में मुन्ना चौक के पास शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर मेडिकल की तैयारी कर रही छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब सामने आ गई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. छात्रा के शरीर पर जांचोपरांत जख्म और नाखून के निशान मिले हैं. नाखून और जख्म के निशान मिलने के बाद पुलिस के आत्महत्या वाले दावे पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

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कंकड़बाग के चित्रगुप्त नगर थाना अंतर्गत शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि संभावित दुष्कर्म और सोची समझी हत्या की ओर इशारा कर रहा है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद हुए कई खुलासे

छात्रा की जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट पीएमसीएच मेडिकल बोर्ड द्वारा दी गई उसके बाद पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है. कई गंभीर सवाल शासन और प्रशासन पर खड़े हो गए हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि छात्रा के शरीर पर 10 से ज्यादा गंभीर जख्म हैं. गर्दन, कंधे और अन्य अंगों पर नाखून के खरोच स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं.

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अंदरूनी हिस्सों में भी चोट का जिक्र पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किया गया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कहा जा सकता है कि छात्रा ने इस हमले से बचने के लिए पूरी ताकत लगाई और संघर्ष किया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि छात्रा के शरीर पर पाए गए जख्म कोई सामान्य या बड़े दुर्घटना का नहीं है.

घटना में कई पहलुओं को लेकर जताई जा रही आशंका

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि घटना से पहले छात्रा को कोई नशीली पदार्थ या नशे की सुई दी गई हो, जिससे वह अचेत हो गई और विरोध करने की स्थिति में नहीं रही. पुलिस के तर्क को देखा जाए तो एएसपी अनुभव कुमार ने अपने बयान में कहा था कि नशे में गिरने के कारण छात्रा को चोट लगी होगी. लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जो खुलासे हुए हैं उसके बाद पटना पुलिस की कार्यशैली और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो चुके हैं.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद खड़े हुए कई सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी थी तो पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले ही किसको क्लीन सीट देने की कोशिश की और क्यों. दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका जताने के बावजूद परिजनों के FIR और आरोप पर पुलिस ने गंभीरता से जांच क्यों नहीं की. अचेत अवस्था में पाई गई छात्रा को प्रारंभिक इलाज के लिए अच्छे अस्पताल में क्यों नहीं ले जाया गया. शरीर पर जख्म और नाखून के निशान को पुलिस ने शुरुआत में क्यों नजरअंदाज किया.

मेडिकल बोर्ड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद अब तक पुलिस चुप क्यों है. जब पुलिस ने दावा किया कि छानबीन के दौरान हॉस्टल में सब कुछ सामान्य था तो सबूत मिटाने के आरोप में मलिक की गिरफ्तारी क्यों हुई. अगर छात्रा बेहोश होकर कमरे में गिरी थी तो कमरे का दरवाजा पुलिस को बताएं बगैर क्यों तोड़ा गया.

क्या दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी?

शक की सुई सबसे पहले स्थानीय थाना के एसएचओ की तरफ जा रही है. स्थानीय थाना ने जो छानबीन की, क्या उसमें लापरवाही बरती गई है. वह कौन डॉक्टर है जिसके बयान को पटना के एसएसपी और एएसपी कोट कर रहे थे. पुलिस को इतनी जल्दबाजी क्यों थी कि उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार तक नहीं किया.

इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस द्वारा दिए गए बयान नीतीश सरकार की जग हंसाई पूरे देश में करवा चुकी है. हम ना किसी को फंसाते हैं ना बचाते हैं वाली यह सरकार अब अपने ही पुलिस के कार्य से फंसती नजर आ रही है. दोषियों पर मजबूती से करवाई और कानून का डंडा चलाने का दावा करने वाली नीतीश सरकार क्या इस मामले में छात्रा को न्याय दिला पाएगी.

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