जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार द्वारा बिहार विधान परिषद की सदस्यता छोड़ने के फैसले के बाद राज्य के नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी पिछले कुछ समय से संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए संकेत दे रहे हैं कि कोई व्यक्ति विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य न रहने के बाद भी छह महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बना रह सकता है. वरिष्ठ मंत्री श्रवण कुमार जैसे नेताओं के इस तरह के बयानों ने इन अटकलों को और हवा दी है.
खरमास के बाद बिहार में परिवर्तन संभव
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि जेडीयू, जिसके पास बीजेपी से केवल चार विधायक कम हैं, अपने सहयोगी दल को मुख्यमंत्री पद का दावा करने की अनुमति देने से पहले कड़ा रुख अपना सकती है. हालांकि एनडीए के सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार, जिन्हें अगले महीने की शुरुआत में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ दिलाई जा सकती है, लंबे समय तक सत्ता में बने नहीं रहेंगे. उनका मानना है कि हिंदू पंचांग के अनुसार अशुभ माने जाने वाले खरमास (14 अप्रैल तक) के बाद ही नेतृत्व परिवर्तन संभव है.
सीएम के दावेदार में टॉप पर सम्राट चौधरी
बीजेपी खेमे में अपने 'खुद के मुख्यमंत्री' मिलने की संभावना को लेकर उत्साह है. हिंदी पट्टी के इस प्रमुख राज्य में लगभग दो दशकों से सत्ता में साझेदार रहने के बावजूद बीजेपी को अब तक मुख्यमंत्री पद नहीं मिला है. मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है, जिनके पास गृह विभाग भी है.
सम्राट चौधरी कोइरी समुदाय से आते हैं, जो राज्य का एक प्रभावशाली अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय है और अब तक किसी एक दल के साथ स्थायी रूप से नहीं जुड़ा रहा है. इसके विपरीत यादव समुदाय को लालू प्रसाद के राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का मजबूत समर्थक माना जाता है, जबकि कुर्मी समुदाय नीतीश कुमार को अपना नेता मानता रहा है.
इसके अलावा नित्यानंद राय का नाम भी चर्चा में है, जो पूर्व में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत हैं. ऐसा माना जाता है कि उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का समर्थन प्राप्त है. बीजेपी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि सम्राट चौधरी को संघ के भीतर उतना समर्थन नहीं मिल सकता, क्योंकि वह 2017 में बीजेपी में शामिल होने से पहले करीब दो दशक तक आरजेडी और जेडीयू में रहे हैं.
कैसे होगा नए मुख्यमंत्री का चयन?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नए मुख्यमंत्री का चयन विधायकों की बैठक में किया जाएगा, लेकिन अंतिम फैसला दिल्ली नेतृत्व द्वारा ही लिया जाएगा. इसके उदाहरण के तौर पर राजस्थान का जिक्र किया जा रहा है, जहां पहली बार विधायक बने भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया गया था. वहीं, जेडीयू के सूत्रों का कहना है कि वे नई सरकार में उचित हिस्सेदारी पर जोर देंगे. साथ ही, हाल ही में पार्टी में सक्रिय हुए नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है.
मीडिया रिपोर्ट्स में चल रहे कई नाम
नीतीश कुमार के बाद बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं. सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के अलावा संजीव चौरसिया का भी नाम चर्चा में है. युवा चेहरा में रत्नेश कुशवाहा का नाम चल रहा है.
अगर महिला मुख्यमंत्री की बात करें तो इसके लिए धर्मशिला गुप्ता और छोटी कुमारी के नाम की चर्चा है. बता दें कि इस बात की पूरी संभावना है कि इस बार बीजेपी से ही कोई सीएम बनेगा. मुख्यमंत्री पद की शपथ के साथ ही जेडीयू कोटे से दो उप मुख्यमंत्री का भी शपथ होगा. इसके लिए विजय कुमार चौधरी और नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के नाम की चर्चा हो रही है.
