पथ निर्माण विभाग की मंजूरी के बिना अब बिहार के शहरी क्षेत्रों में सड़कों की ऊंचाई नहीं बढ़ेगी. विभाग के अभियंता प्रमुख सह अपर आयुक्त की ओर से पत्र जारी करते हुए इंजीनियरों को सख्त निर्देश दिया गया है. पटना हाईकोर्ट में हुई एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद दिए गए निर्देशों को लेकर राज्य सरकार ने नई एसओपी लागू कर दी है. 

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टोपोग्राफिक और लेवलिंग सर्वे अनिवार्य 

नई एसओपी के तहत बिना तकनीकी सर्वे और सक्षम अनुमति के सड़कों की ऊंचाई नहीं बढ़ाई जाएगी. सड़क निर्माण या मरम्मत से पहले टोपोग्राफिक और लेवलिंग सर्वे अनिवार्य किया गया है, ताकि आसपास के घरों में वर्षा के दौरान जलजमाव की समस्या उत्पन्न न हो. इस महत्वपूर्ण मामले में अधिवक्ता राघवेंद्र कुमार द्वारा पक्ष प्रस्तुत किया गया था.

ड्रेनेज सिस्टम, जल निकासी का विशेष ध्यान

नई व्यवस्था के अनुसार, ड्रेनेज सिस्टम, जल निकासी मार्ग और सड़क किनारे की संरचना का विशेष ध्यान रखा जाएगा. संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि सड़क निर्माण के कारण नागरिकों को असुविधा न हो और पूर्व में उत्पन्न जलभराव जैसी समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो.

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इस नई नीति का उद्देश्य सड़क निर्माण को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और नागरिक-हितैषी बनाना है. हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद लागू की गई यह व्यवस्था शहरी नियोजन और आधारभूत संरचना में महत्वपूर्ण सुधार की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.

बता दें कि पटना हाईकोर्ट (C.W.J.C. No. 18202/2022) की ओर से 31 जनवरी 2025 को पारित आदेश के बाद राज्य सरकार ने सड़क निर्माण को लेकर यह सख्त कदम उठाया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सड़क निर्माण केवल स्थानीय समस्या तक सीमित मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे बिहार, विशेषकर सेमी-अर्बन क्षेत्रों के निवासियों को प्रभावित करता है. कोर्ट ने सड़क निर्माण में फ्लैंकिंग, उचित ड्रेनेज व्यवस्था तथा सड़कों की ऊंचाई के वैज्ञानिक निर्धारण को अनिवार्य बताते हुए एक व्यापक एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार करने का निर्देश दिया था.

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