बिहार में एमएलसी के चुनाव के बीच उपेंद्र कुशवाहा के लिए बुरी खबर है. पूरी उम्मीद थी कि उनकी पार्टी (आरएलएम) को एक सीट दी जाएगी क्योंकि बेटे दीपक प्रकाश मंत्री हैं. 10 सीटों (एक पर उपचुनाव को मिलाकर) के लिए होने वाले चुनाव को लेकर जब प्रत्याशियों का ऐलान हुआ तो दीपक प्रकाश का नाम कहीं नहीं आया. ऐसे में सवाल है कि आगे उपेंद्र कुशवाहा के लिए एनडीए में क्या रास्ता है?

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सबसे पहले ये जान लें कि आज (सोमवार) विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि है. एनडीए में जेडीयू से चार और बीजेपी से चार प्रत्याशियों की घोषणा हो चुकी है. एक सीट पर चिराग पासवान की पार्टी ने कैंडिडेट उतारा है. महागठबंधन में आरजेडी से एक सीट पर सुनील सिंह को प्रत्याशी बनाया गया है. अब लगभग तय हो गया है कि और कोई नामांकन नहीं करेगा.

…तो दीपक प्रकाश का इस्तीफा तय!

इस चुनाव के बीच अब यह तय माना जा रहा है कि दीपक प्रकाश बहुत जल्द मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे. वह किसी सदन के सदस्य नहीं हैं. अब आगे 2026 में एमएलसी का कोई चुनाव भी नहीं है.

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पत्नी स्नेहलता बन सकती हैं मंत्री? 

अब बेटे दीपक प्रकाश का मंत्री पद गया तो उपेंद्र कुशवाहा कौन सा कदम उठा सकते हैं सियासी गलियारे में इसकी चर्चा शुरू हो गई है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आगे भी एनडीए का हिस्सा रहेगी. उनकी पार्टी से उनकी पत्नी स्नेहलता सहित कुल चार विधायक हैं. ऐसे में कुशवाहा किसी और को मंत्री बनाने की मांग एनडीए में कर सकते हैं. दूसर ओर ये भी हो सकता है कि बिना मांग के भी उनकी पत्नी या किसी और विधायक को मंत्री बना दिया जाए.

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2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से चार विधायक जीते थे. इनमें सासाराम विधानसभा से उनकी पत्नी स्नेहलता कुमारी जीतीं थीं. मधुबनी विधानसभा से माधव आनंद जीते थे. उनकी भी पार्टी में एक अलग पहचान है. पत्नी नहीं तो फिर इन्हें भी मंत्री बनाया जा सकता है. वे पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं. दिनारा से आलोक सिंह तो वहीं बाजपट्टी से रामेश्वर महतो जीते थे. 

अब इन चार में कौन मंत्री बनेगा यह पार्टी का निर्णय होगा, लेकिन विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक उपेंद्र कुशवाहा अपनी पत्नी स्नेहलता को मंत्री बना सकते हैं. हालांकि इतना आसान भी नहीं है. जब दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया गया था तो माधव आनंद काफी गुस्से में थे. कुशवाहा की पत्नी को छोड़कर अन्य सभी तीन विधायक गोलबंद हो गए थे. 

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