बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन का आज (सोमवार, 8 जून) अंतिम दिन है. बीजेपी नीत एनडीए में उम्मीदवारों के नाम भी फाइनल हो गए हैं. इस बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर बड़ी खबर आ रही है. बताया जा रहा है कि दीपक प्रकाश इस चुनाव के लिए नामांकन नहीं भरेंगे. ऐसे में उनका मंत्री पद जाना तय माना जा रहा है. 

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सूत्रों की मानें तो उपेंद्र कुशवाहा को बीजेपी की ओर से ऑफर मिला था कि उनके बेटे को कमल के चुनाव चिन्ह पर विधान परिषद में भेजा जाए. उपेंद्र कुशवाहा इसके लिए राजी नहीं हुए जिसके बाद अब NDA ने दीपक प्रकाश विधान परिषद का उम्मीदवार नहीं बनाया है. 

दीपक प्रकाश का मंत्री पद बचना असंभव 

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दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश बिहार विधानमंडल के सदस्य नहीं हैं. न ही उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा और न ही उन्हें विधान परिषद का उम्मीदवार बनाया गया है. नियमों के अनुसार, बिना विधायक या परिषद सदस्य बने केवल 6 महीने तक ही मंत्री पद पर रहा जा सकता है. इसके बाद मंत्री के पास दो ही विकल्प होते हैं, या तो उपचुनाव के जरिए सदन के सदस्य बनें या फिर इस्तीफा दें. 

21 नवंबर 2025 को दीपक प्रकाश ने मंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी. इसके अगले दिन 22 नवंबर को उन्हें पंचायती राज मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई. इस हिसाब से उनके 6 महीने का कार्यकाल 20 मई 2026 को ही पूरा हो चुका है. अगर उनका मंत्री पद पर बने रहना तय होता तो उन्हें इस परिषद चुनाव के जरिए सदस्यता दिला दी जाती. हालांकि, ऐसा हुआ नहीं.

दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर नियुक्ति को SC में चुनौती

बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है. याचिका में तर्क दिया गया है कि अनुच्छेद 164(4) के तहत 6 महीने बाद किसी गैर-विधायक को पुनर्नियुक्त नहीं किया जा सकता. याचिका के जरिए मंत्री पदों की नियुक्ति में संवैधानिक सीमाओं, वैधता और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर सवाल उठाए गए हैं.