बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने एक बार फिर सियासी बहस को तेज कर दिया है. एनडीए के विपक्षी दल RJD ने अपने सोशल मीडिया पेज 'एक्स' पर बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश की फोटो साझा करते हुए सवाल उठाए हैं कि कैसे वे बिना चुनाव लड़े ही नीतीश सरकार में मंत्री बन गए.

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RJD के पोस्ट में आरोप लगाया गया है, "सासाराम में जमानत जब्त कराने वाले निर्दलीय प्रत्याशी रामनारायण पासवान के काउंटिंग एजेंट बने दीपक प्रकाश बिना चुनाव लड़े नीतीश सरकार में मंत्री बन गए. ये है ना मोदी-नीतीश का जादू? अब और कैसा विकास चाहिए बिहार में?" इस पोस्ट के जरिए RJD ने सीधे तौर पर यह सवाल उठाया कि बिहार में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और प्रशासनिक फैसलों के बीच संतुलन कैसे बन रहा है.

राजद ने दीपक प्रकाश के मंत्री बनने पर जताया संदेह

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला बिहार विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में और अधिक संवेदनशील हो गया है. RJD का यह पोस्ट सत्ताधारी गठबंधन पर निशाना साधते हुए जनता के बीच सवाल पैदा करने की कोशिश माना जा रहा है. पोस्ट में दीपक प्रकाश को सीधे तौर पर नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'जादू' का हिस्सा बताया गया है, जिसका उद्देश्य उनके मंत्री बनने की प्रक्रिया पर संदेह जताना है.

दीपक प्रकाश की नियुक्ति पूरी तरह संवैधानिक- सत्ताधारी दल

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की पोस्ट से मतदाताओं के मन में राजनीतिक संदेश तेजी से पहुंचता है. RJD के इस कदम को विपक्षी दल के तौर पर सत्ता और सत्ताधारी गठबंधन के बीच संतुलन पर सवाल उठाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. वहीं, सत्ताधारी दल के नेताओं का कहना है कि मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति पूरी तरह संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुई है.

सोशल मीडिया पर सत्ताधारी और विपक्षी दलों में छिड़ा विवाद

राजनीतिक पृष्ठभूमि में यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि आगामी चुनावों से पहले विपक्ष यह संदेश देना चाहता है कि सत्ता पक्ष अपनी पसंद और समर्थन के आधार पर निर्णय ले रहा है. RJD ने यह भी संकेत दिया है कि जनता को ऐसे मामलों पर नजर रखनी चाहिए और बिहार में विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाना चाहिए.

इस पोस्ट के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है. सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी दलों के बीच सोशल मीडिया पर यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है. जनता इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही है और यह मामला बिहार की राजनीतिक सरगर्मियों में नया मोड़ जोड़ सकता है.

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