मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाएंगे. गुरुवार (05 मार्च, 2026) को उन्होंने नामांकन दाखिल किया. इस मौके पर खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद पटना में रहे. इस बीच सीएम के इस फैसले से जेडीयू कार्यकर्ताओं में नाराजगी है. जेडीयू कार्यकर्ताओं ने विरोध में पार्टी कार्यालय में हंगामा किया. तोड़फोड़ की. 

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दरअसल, जेडीयू कार्यालय में कार्यकर्ताओं के खाने-पीने की व्यवस्था की गई थी. टेबल लगाए गए थे, प्लेट लगाए गए थे. कार्यकर्ताओं ने भोजन नहीं किया. उनका गुस्सा साफ दिख रहा था. ऐसा सदमा लगा कि कुछ कार्यकर्ताओं ने टेबल को पलट दिया. प्लेट को तोड़ दिया. 

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'हम लोगों ने होली नहीं मनाई… कल से भूखे हैं'

एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि हम लोगों को कल से जब सूचना मिली है उस वक्त से हम लोगों ने होली नहीं मनाई है. कल से हम लोग भूखे हैं, यहां कार्यालय में भोज की व्यवस्था की जा रही है, इसलिए तोड़फोड़ करना जरूरी था.

कुछ कार्यकर्ताओं ने कहा कि चालबाजी से सत्ता नहीं हासिल की जा सकती है. जब जनता ने 2025 से 30 फिर से नीतीश के नारे पर वोट किया था फिर बीच में नीतीश कुमार को क्यों हटाया जा रहा है? निशांत के समर्थकों ने कहा कि हम लोग निशांत को जेडीयू में लाने की मांग कर रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार को देखना चाहते हैं. बीच में यह खेल बीजेपी के द्वारा किया जा रहा है जो बर्दाश्त नहीं होगा. बिहार की जनता इसका जवाब बहुत जल्द देगी.

'नीतीश कुमार ने सोचा और जमीन पर उतारा'

दूसरी ओर जेडीयू नेता राजीव रंजन प्रसाद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फैसले पर कहा, "...आधारभूत संरचना से लेकर, आम लोगों के जीवन की बेहतरी के लिए एक दूरदर्शी नेता के तौर पर नीतीश कुमार ने सोचा और उसे जमीन पर उतारा... नीतीश कुमार के योगदान की चर्चा दशकों तक होती रहेगी और ये फैसला उन्होंने लिया. कार्यकर्ताओं के लिए इस फैसले को आत्मसात करना बहुत सहज नहीं है लेकिन उन्होंने अपनी भावनाएं एक्स पर रखी हैं और निःसंदेह जब एक दृढ़निश्चयी नेता के तौर पर जब वे फैसले लेते हैं तो उस फैसले को अमलीजामा पहनाते हैं."

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