बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भोजपुरी स्टार पवन सिंह की बीजेपी में वापसी हो चुकी है. मंगलवार (30 सितंबर, 2025) को उन्होंने दिल्ली में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात की. जेपी नड्डा और अमित शाह से भी वे मिले. अब सियासी गलियारे में चर्चा शुरू हो गई है कि पवन सिंह अगर चुनाव लड़ते हैं तो बीजेपी कहां से टिकट दे सकती है? कौन सी वो सीटें हैं जहां से उनकी दावेदारी मजबूत हो सकती है?
ऐसी संभावना व्यक्त जताई जा रही है कि उन्हें आरा या बड़हरा विधानसभा से टिकट दिया जा सकता है. इसकी चर्चा खूब हो रही है. सवाल है कि पवन सिंह के लिए इन्हीं दोनों सीट की चर्चा क्यों हो रही है? इसका समीकरण समझिए.
पवन सिंह मूल रूप से भोजपुर जिले के जोकहरी गांव के रहने वाले हैं. पैतृक घर बड़हरा विधानसभा सीट में आता है. दूसरी ओर एक घर उनका आरा टाउन में भी है. पवन सिंह राजपूत जाति से आते हैं. जातीय समीकरण को देखें तो बड़हरा और आरा राजपूत बहुल सीटें हैं. यादव और कोइरी जाति इन दोनों सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
आरा से क्यों मिल सकता है टिकट?
आरा सीट से राजपूत-यादव के वोटर्स की संख्या ज्यादा है. माना जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा और पवन सिंह के मिलने से कोइरी जाति के वोट में बिखराव नहीं होगा. यहां पर मुस्लिम वोटर भी 10 प्रतिशत से अधिक हैं. इस सीट पर बीजेपी का लंबे समय से कब्जा रहा है. बीजेपी के अमरेंद्र प्रताप सिंह 2000 से 2010 में विधायक रहे. 2015 के विधानसभा चुनाव में जब नीतीश-लालू एक साथ थे, तब महागठबंधन के मोहम्मद नवाज आलम ने अमरेंद्र प्रताप सिंह को महज 666 वोट से हराया था. हालांकि 2020 में जेडीयू और बीजेपी मिलकर चुनाव लड़ी तो अमरेंद्र प्रताप सिंह फिर से विधायक बने. अमरेंद्र प्रसाद सिंह की उम्र अब ज्यादा हो चुकी है, ऐसे में माना जा रहा है कि पवन सिंह को यहां से टिकट मिल सकता है.
बड़हरा सीट पर भी बीजेपी का कब्जा
दूसरी ओर बड़हरा सीट की भी चर्चा है. इस सीट पर अभी बीजेपी का कब्जा है. राघवेंद्र प्रताप सिंह विधायक हैं. इस सीट पर मुख्य रूप से राजपूत, यादव और कोइरी जाति के वोटर्स अहम भूमिका निभाते हैं. राघवेंद्र प्रताप सिंह छह बार इस सीट से विधायक रह चुके हैं.
1985 में जनता पार्टी, 1990 और 1995 में जनता दल, 2000 में आरजेडी के टिकट पर वो जीते थे. 2005 में जेडीयू से आशा देवी जीती थीं. 2010 में आरजेडी से राघवेंद्र प्रताप सिंह जीते लेकिन 2015 में सरोज यादव आरजेडी से जीते थे. इसके बाद राघवेंद्र प्रताप सिंह बीजेपी में आ गए. 2020 में वे जीत गए. राघवेंद्र प्रताप सिंह की भी उम्र अधिक हो चुकी है. ऐसे में पवन सिंह यहां से भी लड़ सकते हैं.
