बिहार विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण में एनडीए और महागठबंधन दोनों के सामने अपनी पारंपरिक सीटों को बचाने और नए क्षेत्रों में असर बढ़ाने की चुनौती है. 11 नवंबर को होने वाले मतदान में दोनों गठबंधनों की सफलता काफी हद तक उनके छोटे सहयोगियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी, जिन्होंने इस चरण में अधिकतर सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.

एनडीए की ओर से केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 28 में से 15 सीटों पर मैदान में है, जबकि जीतन राम मांझी की हम सभी 6 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. दलित समाज में चिराग पासवान और मांझी दोनों की मजबूत पकड़ है. वहीं उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम को 6 सीटें मिली हैं, जिनमें उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा भी प्रत्याशी हैं.

इस सीट पर महागठबंधन ने जीती थी 26 में से 20 सीटें

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मगध क्षेत्र में बीजेपी-जदयू गठबंधन के लिए यह चरण बेहद अहम है, क्योंकि 2020 में यहां की 26 में से 20 सीटें राजद नेतृत्व वाले महागठबंधन ने जीती थीं. एनडीए के लिए इस बार दलित नेताओं पर उम्मीद टिकी है कि वे यहां उसकी स्थिति सुधार सकते हैं. महागठबंधन की ओर से कांग्रेस 61 में से 37 सीटों पर और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) 12 में से 7 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. उम्मीद है कि मुकेश सहनी की पार्टी निषाद वोटरों को अपने पक्ष में कर पाएगी. सहनी, जो पहले एनडीए का हिस्सा थे उनको महागठबंधन ने खुश रखने के लिए उपमुख्यमंत्री पद का वादा तक किया है.

चुनाव 2025 का सीमांचल क्षेत्र बना मुख्य केंद्र

सीमांचल क्षेत्र एक बार फिर इस चुनाव का केंद्र बना हुआ है. यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है. असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम (AIMIM) 2020 में 5 सीटें जीतकर सबको चौंका चुकी थी और इस बार भी मैदान में है. कांग्रेस यहां 12 और राजद 9 सीटों पर मुकाबले में है. एनडीए को उम्मीद है कि अगर ओवैसी कुछ मुस्लिम वोट काटते हैं, तो हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण से उसे फायदा होगा.

तीसरा विकल्प बनने की कोशिश में जन सुराज पार्टी

दूसरी ओर, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी इस बार तीसरा विकल्प बनने की कोशिश में है. पहले चरण में 65% से ज्यादा मतदान ने सभी दलों को उत्साहित किया है. अब दूसरे और अंतिम चरण का रुझान ही तय करेगा कि जनता का उत्साह किसके पक्ष में जाता है.

इस चरण में बीजेपी 53, जदयू 44, राजद 71 और सीपीआई(एमएल) 6 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. यानी अंतिम चरण में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है.

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