बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वंशवाद की राजनीति से दूरी बनाए रखने की अपनी छवि के बावजूद मंगलवार (03 मार्च, 2026) को अपने इकलौते बेटे निशांत कुमार को राजनीति में आने की सहमति दे दी. इस घटनाक्रम से जनता दल (यूनाइटेड) में उत्साह की लहर दौड़ गई और अटकलें तेज हो गईं कि निशांत को राज्यसभा भेजा जा सकता है.

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यह घोषणा राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री और जद-(यू)के वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार ने की. श्रवण कुमार 1990 के दशक में समता पार्टी के समय से ही जद-(यू) सुप्रीमो के करीबी सहयोगी रहे हैं.

श्रवण कुमार ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, "होली की पूर्व संध्या पर मैं बिहार के लोगों के साथ एक अच्छी खबर साझा करना चाहता हूं. जद-(यू) के भीतर और राज्य के युवाओं के बीच काफी समय से यह मांग उठ रही थी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत राजनीति में आएं. इसके लिए रास्ता साफ हो गया है और एक-दो दिन में औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी."

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जब उनसे पूछा गया कि क्या इंजीनियरिंग में स्नातक और 40 वर्ष की उम्र पार कर चुके निशांत को राज्यसभा के चुनाव में पार्टी के दो उम्मीदवारों में से एक बनाया जा सकता है, तो उन्होंने कहा, "कुछ भी संभव है. शीर्ष नेता बैठकर चर्चा करेंगे और एक-दो दिन में सब स्पष्ट हो जाएगा."

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यह खबर फैलते ही पटना स्थित जद-(यू) के प्रदेश कार्यालय में जश्न का माहौल बन गया. कार्यालय की दीवारों पर पिछले कुछ समय से ऐसे पोस्टर लगे थे जिनमें पार्टी कार्यकर्ता नीतीश कुमार के पुत्र से नेतृत्व संभालने की मांग कर रहे थे. इस खबर के आते ही कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटी, एक-दूसरे को गुलाल लगाया और नारे लगाकर अपने नेता के बेटे के राजनीति में आने की खुशी जताई.

'शालीन व्यवहार के कारण निशांत लोकप्रिय'

राज्य सरकार में मंत्री और जद-(यू) के राष्ट्रीय महासचिव अशोक चौधरी ने कहा, "यह बहुत अच्छी खबर है. निशांत अपने शालीन व्यवहार के कारण बिहार के लोगों में लोकप्रिय हैं. वे अपने पिता की तरह इंजीनियर हैं और कई मामलों में उनसे समानता रखते हैं."

वंशवाद के सवाल पर चौधरी ने कहा, "हमारे नेता किसी अयोग्य संतान को पार्टी पर नहीं थोप रहे हैं. निशांत में एक अच्छा नेता बनने की पूरी क्षमता है और पार्टी ही चाहती थी कि वह राजनीति में आएं."

सहयोगी दलों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है. प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा, "यदि नीतीश कुमार के पुत्र राजनीति में आते हैं तो यह अच्छी बात है. नयी पीढ़ी के नेतृत्व के उभरने का समय है."

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