बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां अब तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ 4 और 5 अक्टूबर को बिहार का दौरा करेंगे. इस दौरान आयोग की टीम राज्य में प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करेगी.

यह उच्चस्तरीय दौरा ऐसे समय हो रहा है जब चुनाव आयोग 30 सितंबर को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के आधार पर अंतिम मतदाता सूची जारी करने जा रहा है. विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि लाखों-करोड़ों वास्तविक मतदाता इससे वंचित हो सकते हैं. हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि एसआईआर का मकसद चुनावी प्रणाली को और पारदर्शी बनाना है.

जमीनी हालात का आकलन करेगी आयोग की टीम

बिहार विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है. ऐसे में राज्य में नए विधानसभा चुनाव होना तय है. अधिकारियों के अनुसार, आयोग की टीम पटना में राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठकर जमीनी हालात का आकलन करेगी. आमतौर पर चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले यह प्रक्रिया की जाती है.

तीन से चार चरणों में हो सकता है चुनाव 

सूत्रों का कहना है कि बिहार दौरे के बाद चुनाव आयोग की ओर से कुछ ही दिनों में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा संभव है. पिछले अनुभवों के आधार पर उम्मीद है कि इस बार भी बिहार में तीन से चार चरणों में चुनाव हो सकते हैं. हालांकि, इस बार आयोग के सामने त्योहारों की चुनौती भी है क्योंकि चुनावी माहौल दिवाली और छठ जैसे बड़े पर्वों के बीच रहेगा. मतदाताओं को किसी भी असुविधा से बचाने के लिए आयोग पहले से ही सतर्क दिखाई दे रहा है.

पहले कितने चरण में हुए थे चुनाव?

बिहार में विधानसभा चुनावों का इतिहास भी चरणबद्ध मतदान का गवाह रहा है. साल 2020 में यहां तीन चरणों में 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर को चुनाव हुए थे. परिणाम 10 नवंबर को घोषित किए गए थे. वहीं 2015 में पांच चरणों में चुनाव हुए थे, जबकि 2010 में छह चरणों में मतदान संपन्न हुआ था. 2005 में तो दो बार फरवरी में तीन चरणों में और अक्टूबर में तीन चरणों में चुनाव कराए गए थे.