भरत तिवारी एनकाउंटर (Bharat Tiwari Encounter) मामले में सोमवार (10 अगस्त, 2026) को आरा व्यवहार न्यायालय के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत ने सुनवाई की. शाहपुर थाने में कांड संख्या 178/2026 दर्ज है. 

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एसटीएफ जवान अक्षय की हो चुकी गिरफ्तारी

भरत तिवारी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने बताया कि कोर्ट की ओर से प्राथमिकी और जांच के दौरान सामने आए नामों के आधार पर कुल 11 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है. इनमें तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार, तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, पुलिसकर्मी अंकित आर्यन, हरिश्चंद्र कुमार, एसटीएफ जवान अक्षय कुमार, विकास कुमार, एएसआई रमाशंकर यादव समेत अन्य आरोपी शामिल हैं. यहां बता दें कि एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है.

कोर्ट ने कहा- गैर जमानती वारंट जारी नहीं

संजीव कुमार सिंह ने गिरफ्तारी का दावा किया है, लेकिन कोर्ट की मानें तो अभी गैर जमानती वारंट जारी नहीं किया गया है. कोर्ट की ओर से कहा गया कि वकील ने 11 प्वाइंट पर अपना पक्ष रखा था. उसी पर अपडेट मांगा गया है. 

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क्या-क्या जानकारी मांगी गई?

अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह के अनुसार, कोर्ट की ओर से पुलिस से जानकारी मांगी गई है कि मामले की जांच कब शुरू हुई, अब तक जांच में क्या-क्या कदम उठाए गए और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने क्या कार्रवाई की. मिसलेनियस रिपोर्ट के आधार पर रिपोर्ट मांगी गई है.

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संजीव कुमार ने बताया कि अदालत के सामने इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस, मोबाइल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और जांच के दौरान दर्ज किए गए गवाहों के बयान से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग भी की गई. भरत तिवारी के मोबाइल फोन को जांच के लिए पुलिस द्वारा जब्त किए जाने का भी जिक्र किया गया. परिवार और अधिवक्ता की ओर से दावा किया गया है कि मोबाइल एवं अन्य डिजिटल माध्यमों में मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं. 

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