बिहार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है. दोनों नेताओं ने मीडिया से बातचीत में ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर निशाना साधा.

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संजय सरावगी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अवैध घुसपैठियों, बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को संरक्षण दे रही है. उनका कहना है कि इसका सीधा असर पश्चिम बंगाल के संसाधनों और आम लोगों पर पड़ रहा है.

अमित शाह के बयान का समर्थन

इस मुद्दे पर सरावगी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हालिया बयान का भी समर्थन किया. उन्होंने कहा, “गृह मंत्री ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार की स्थिति के बारे में बिल्कुल सही कहा है. टीएमसी सरकार घुसपैठियों, शरणार्थियों और बांग्लादेशी नागरिकों को संरक्षण दे रही है. पश्चिम बंगाल के संसाधनों का घुसपैठिए और रोहिंग्या कर रहे हैं. इसकी वजह से बंगाल के लोगों को संसाधनों की कमी हो रही है."

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उन्होंने आगे कहा, "पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की आबादी लगातार बढ़ रही है. पूरी सरकार बांग्लादेशियों और घुसपैठियों को संरक्षण देने में लगी हुई है. आने वाले दिनों में इसका खामियाजा ममता बनर्जी और टीएमसी को भुगतना पड़ेगा. इस बार बीजेपी की सरकार बनेगी और ममता दीदी अपने घर जाएंगी.”

सीमा पर बाड़ लगाने की जरूरत

वहीं मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने सीमा सुरक्षा का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा, "बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्र पहले पाकिस्तान से लगते थे और अब पश्चिम बंगाल से लगते हैं. बांग्लादेश का बॉर्डर असम से लेकर बंगाल तक फैला हुआ है. इसलिए, पूरे क्षेत्र में बाड़ लगाना आवश्यक है. कहीं पहाड़ है और कहीं नदी है, इसलिए बाड़ लगाने में दिक्कत हो रही है, लेकिन इसका फायदा घुसपैठिए उठा रहे हैं. इसलिए देश की सुरक्षा के लिए बाड़ लगाना जरूरी है."

बीजेपी का ‘श्वेत पत्र’ और बड़े आरोप

गौरतलब है कि अमित शाह ने शनिवार को बीजेपी की ओर से पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 15 साल के शासन पर 35 पन्नों का ‘श्वेत पत्र’ जारी किया. इस रिपोर्ट में पांच बड़े मुद्दों को उठाया गया है. घुसपैठ, व्यवस्था में भ्रष्टाचार और संस्थाओं की कमजोरी, आर्थिक और औद्योगिक गिरावट, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था, और सामाजिक ढांचे का कमजोर होना.

‘श्वेत पत्र’ में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच 2,216.7 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा में से 569 किमी हिस्सा अभी भी बिना बाड़ के है. रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन अधिग्रहण में देरी के कारण यह काम अधूरा है, जिससे घुसपैठ को बढ़ावा मिला.

इसके साथ ही दस्तावेज में यह भी आरोप लगाया गया है कि टीएमसी ने वोट बैंक बनाने के लिए घुसपैठियों को फर्जी पहचान पत्र दिलाने में सिंडिकेट चलाए, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसंख्या संतुलन पर असर पड़ा.

बंगाल चुनाव नजदीक आते ही घुसपैठ और सीमा सुरक्षा का मुद्दा फिर से राजनीति के केंद्र में आ गया है. बीजेपी लगातार इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना रही है, जबकि टीएमसी इन आरोपों को खारिज करती रही है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तेज होने के आसार हैं.