बिहार की राजधानी पटना स्थित बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के परिणामों में भारतीय जनता पार्टी न केवल हारी बल्कि उसने सियासत के नए समीकरणों को भी गढ़ दिया है. उपचुनाव के शुरुआती रुझानों में 26 राउंड की गिनती तक प्रशांत किशोर, 15, 864मतों से बीजेपी के नीरज सिन्हा से आगे थे.
जनसुराज पार्टी के संस्थापक नेता प्रशांत किशोर अपनी पार्टी के पहले नेता होंगे जो विधानसभा पहुंचेंगे. साल 2025 के नवंबर में संपन्न हुए चुनावों में किशोर की पार्टी ने सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन किसी भी क्षेत्र में खाता तक नहीं खुला था.
अब बांकीपुर में भारतीय जनता पार्टी के नीरज सिन्हा को हराकर प्रशांत किशोर ने राज्य की सियासत को नया विकल्प दे दिया है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो प्रशांत अब नीतीश कुमार के चाहने वालों का नया विकल्प बन सकते हैं.
20 साल वाले बयान के बाद चर्चा बढ़ी
सियासत में अपनी पारी के पहले दिन से प्रशांत कुमार, नीतीश कुमार पर हमलावर तो रहे लेकिन कभी ऐसा तीखा हमला नहीं बोला जो सियासी आचरण के परे हो. हाल ही में जब प्रशांत किशोर का आमना-सामना चुनाव के दौरान पुलिसकर्मी से हुआ तब भी उन्होंने यही कहा कि बीते 20 वर्षों में ऐसा कभी नहीं हुआ था. प्रशांत ने स्पष्ट कहा था- '20 सालों के राज में प्रशासन और पुलिस का दुरुपयोग हमने नहीं देखा'
बिहार की सियासत में लंबे समय से जनता दल यूनाइटेड और बीजेपी के अलायंस के अलावा राष्ट्रीय जनता दल एवं उसके गठबंधन को छोड़ दें तो कोई भी सियासी गठबंधन या दल, अपनी निजी हैसियत में खुद को जनता के सामने विकल्प के तौर पर पेश नहीं कर सका.
बांकीपुर के नए सियासी समीकऱण के यह संकेत मिल रहे हैं कि वह जदयू के वह मतदाता जो मजबूरन और विकल्पहीनता के चलते बीजेपी या एनडीए के साथ या राजद और महागठबंधन के समर्थक जो किसी नए विकल्प की तलाश में थे, वह अब इस ओर रुख कर सकते हैं.
यहां यह भी गौर करने वाली बात है कि जब नीतीश ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा तो उसके बाद प्रशांत किशोर पूर्व सीएम को लेकर नरम पड़ गए. नीतीश के सीएम रहते हुए जब प्रशांत ने यात्रा शुरू की तब भी वह जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए निजी गरिमा का पालन किया.
नीतीश पर प्रशांत के बयान
साल 2022 में बिहार में 'जन सुराज' यात्रा के दौरान जब प्रशांत किशोर नीतीश सरकार की नीतियों और अफसरशाही पर तीखे हमले करते थे तब भी उन्होंने नीतीश कुमार की निजी शुचिता का बचाव किया. PK ने स्पष्ट रूप से कहा, 'नीतीश कुमार व्यक्तिगत तौर पर चोर नहीं हैं, यह कहने में मुझे कोई झिझक नहीं है.' उन्होंने यह आरोप लगाए कि बिहार सरकार भले ही भ्रष्टाचार और अफ़सरशाही से घिरी हो, लेकिन नीतीश कुमार ने अपने लिए, अपने परिवार के लिए या निजी संपत्ति बनाने के उद्देश्य से कभी वित्तीय भ्रष्टाचार नहीं किया.
नीतीश को लेकर प्रशांत किशोर अपने बयानों में अंतर लाते रहे हैं. उनका कहना था कि वे 2015 से पहले वाले उस नीतीश कुमार का आज भी बेहद सम्मान करते हैं, जिन्होंने बिहार की तस्वीर बदली और विकास की नींव रखी. हालांकि, उनका मानना है कि वर्तमान के नीतीश कुमार राजनीतिक समझौतों और अफसरशाही में घिरे हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके शुरुआती 10-12 वर्षों के ऐतिहासिक काम, प्रशासनिक पकड़ और व्यक्तिगत ईमानदारी पर सवाल नहीं उठाया जा सकता.
सम्राट की अगुवाई को जनता के बीच कैसे ले गए प्रशांत?
अब बात सम्राट चौधरी की. सम्राट चौधरी को लेकर प्रशांत किशोर, सामान्य चुनावों के दिनों से ही आक्रामक रहे. चाहे उनकी डिग्री का मामला हो या उनकी उम्र या उन पर कथित आपराधिक आरोपों का, प्रशांत ने हर मंच से सम्राट की आलोचना की. इतना ही नहीं उपचुनाव में प्रशांत ने जनता से स्पष्ट कहा कि अगर आप चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी आलाकमान, सम्राट को सीएम पद से हटाए तो वह लोग उन्हें वोट करें.
चाहे पटना प्रोटेस्ट की बात हो या भरत तिवारी का मामला, मुद्दे पर जनसुराज ने सीधे तौर पर सम्राट को घेरा. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सियासी गलियारों में नीतीश कुमार के समर्थकों को अपने साथ लाने की चर्चा को प्रशांत ने बांकीपुर के परिणाम के जरिए जिस तरह से बल दिया, वह भविष्य में कितना सफल हो पाएगा या एनडीए जनसुराज को लेकर किसी नई रणनीति पर काम करेगी.
