Olympics Games Tokyo 2020: भारत की महिला हॉकी टीम ने इतिहास रचते हुए आज अपने से कहीं ज्यादा मज़बूत और तीन बार की ओलंपिक चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से हराकर टोक्यो ओलंपिक के सेमीफाइनल में जगह बना ली है. सबसे खास बात यह है कि महिला टीम पहली बार सेमीफाइनल में पहुंची है. अब उसका सामना 4 अगस्त को विश्व की पांचवें नंबर की टीम अर्जेटीना से होगा, जिसने क्वार्टर फाइनल में जर्मनी को हराया है. 


ओई हॉकी स्टेडियम नॉर्थ पिच-2 पर खेले गए इस ऐतिहासिक मैच में हाकेरूज नाम से मशहूर ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ मैच का एकमात्र गोल 22वें मिनट में गुरजीत कौर ने किया. यह गोल पेनाल्टी कार्नर पर हुआ. 


दुनिया की 9वें नंबर की भारतीय टीम ने तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए दुनिया की दूसरे नंबर की ऑस्ट्रेलिया को हराया और पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंची. अब उसका सामना 4 अगस्त को विश्व की पांचवें नंबर की टीम अजेर्टीना से होगा. 


भारत अपने तीसरे ओलंपिक में खेल रहा है. मास्को (1980) के 36 साल के बाद उसने रियो ओलंपिक (2016) के लिए क्वालीफाई किया था. मास्को ओलंपिक में महिला हॉकी टूर्नामेंट 25 जुलाई से शुरू होकर 31 जुलाई तक चला था. इसमें सिर्फ छह टीमों ने हिस्सा लिया था. जिम्बाब्वे ने पूल चरण के समापन पर पूल के शीर्ष पर गोल्ड मेडल जीता. चेकोस्लोवाकिया और सोवियत संघ ने क्रमश: रजत और कांस्य पदक जीता था. भारत ने पूल में पांच मैचों में दो जीत हासिल की थी. उसका एक मैच ड्रॉ रहा था जबकि उसे दो मैचों में हार मिली थी. पांच अंकों के साथ भारत अंतिम रूप से चौथे स्थान पर रहा था. 


इसके बाद भारत ने 2016 के रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया. लेकिन वह 12 टीमों के टूर्नामेंट में अंतिम स्थान पर रही थी. भारत को पूल स्तर पर पांच मैचों में सिर्फ एक ड्रॉ नसीब हुआ था. 


टोक्यो ओलंपिक भारतीय हॉकी के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ है. महिला टीम के साथ-साथ पुरुष टीम भी सेमीफाइनल में पहुंच गई है. भारतीय हॉकी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि दोनों टीमें मेडल राउंड में पहुंची हैं. 


यह मैच भारतीय हॉकी के इतिहास के सबसे बड़े मैचों में से एक है और इसे सदियों तक याद रखा जाएगा. अर्जेटीना के खिलाफ सेमीफाइनल का रिजल्ट चाहें जो हो, लेकिन भारतीय टीम ने इतिहास रच दिया है. अब वह सेमीफाइनल में भी इसी तरह बिना दबाव के खेले तो उसे पदक जीतने से कोई नहीं रोक सकता है.