इजराइल में क्रिकेट कभी मुख्यधारा का खेल नहीं रहा. यहां न बड़े स्टेडियम हैं. न स्टार खिलाड़ी और न ही क्रिकेट को वैसी लोकप्रियता मिली है जैसी पारंपरिक क्रिकेट देशों में देखने को मिलती है. इसके बावजूद भारत, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया से आए प्रवासियों ने इस खेल को यहां जीवित रखा है. खासकर भारतीय समुदाय ने क्रिकेट को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया है. इजराइल क्रिकेट एसोसिएशन के बिजनेस और स्ट्रैटेजिक मैनेजर युवाल विनर ने कहा कि ज्यादातर खिलाड़ी दिन में नौकरी करते हैं और खाली समय में क्रिकेट खेलते हैं. इसी वजह से यह खेल लंबे समय तक पेशेवर स्तर तक नहीं पहुंच सका.

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संसाधनों की कमी सबसे बड़ी चुनौती

इजराइल के सामने सबसे बड़ी परेशानी क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर की है. देश में अच्छी पिच और बड़े मैदानों की कमी है. सीमित संसाधनों के बीच खिलाड़ी लंबी दूरी तय कर मैच खेलते हैं. जबकि कई कोच, ग्राउंड्समैन की जिम्मेदारी भी निभाते हैं. युवाल के अनुसार देश में फिलहाल करीब 12 क्रिकेट क्लब हैं. महिला क्रिकेट को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके अलावा निर्माण कंपनियों के सहयोग से 18 टीमों की लीग भी तैयार की गई है. अब एसोसिएशन प्रायोजकों और निवेशकों की तलाश में जुटी है.

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बीसीसीआई से सहयोग की उम्मीद

इजराइल क्रिकेट एसोसिएशन को उम्मीद है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) भविष्य में उसके क्रिकेट विकास में सहयोग करेगा. युवाल विनर का कहना है कि भारत विश्व क्रिकेट का सबसे बड़ा केंद्र है और बीसीसीआई पहले नेपाल और अफगानिस्तान जैसे देशों की मदद कर चुका है. उनका मानना है कि भारत-इजरायल के अच्छे संबंधों के बीच अगर बीसीसीआई का साथ मिलता है तो इजराइल भी उभरते क्रिकेट देशों की कतार में तेजी से आगे बढ़ सकता है.

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