गुरुवार को BCCI की बहुत महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें हेड कोच गौतम गंभीर से लेकर श्रेयस एयर और शुभमन गिल भी शामिल हुए. उनके अलावा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के डायरेक्टर वीवीएस लक्ष्मण भी मौजूद रहे. मगर बैठक में अजीत अगरकर की गैरमौजूदगी ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. अगरकर वर्चुअल माध्यम से भी मीटिंग में शामिल नहीं हुए, जिसपर BCCI ने चुप्पी तोड़ी है. 

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अजीत अगरकर का कार्यकाल सितंबर महीने में समाप्त हो रहा है, इसलिए उनकी इस बैठक में मौजूदगी बहुत अधिक मायने रखती थी. बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने बताया है कि अगरकर किसी ऐसी जगह पर थे, जहां से उनके लिए इस मीटिंग से जुड़ पाना संभव नहीं था.

देवजीत सैकिया ने कहा, "वह शहर से बाहर थे और मीटिंग का हिस्सा नहीं बन पाए. यह बैठक बहुत शॉर्ट नोटिस पर बुलाई गई थी, अगरकर उस समय शहर में नहीं थे. वह ऐसी जगह पर थे, जहां की प्रयासों के बाद भी ऑनलाइन माध्यम से मीटिंग से नहीं जुड़ सकते थे."

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बताया जा रहा था कि 3 सितंबर को हुई इस बैठक में अगरकर के चीफ सेलेक्टर के तौर पर कार्यकाल को लेकर भी फैसला लिया जाएगा. दावा सामने आया था कि अगरकर का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया जा सकता है, जिसकी अब तक कोई पुष्टि नहीं हो सकी है. जब सैकिया से इस संबंध में सवाल पूछा गया, तब उन्होंने कहा कि मीटिंग में ऐसे किसी विषय पर चर्चा हुई ही नहीं.

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बतौर चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर के की फैसले आलोचनाओं में घिरे रहे हैं. इनमें से एक रोहित शर्मा से कप्तानी लेना भी एक रहा, जो खासतौर पर वनडे कप्तान के तौर पर खूब सफलता हासिल कर रहे थे. अब शुभमन गिल कप्तान बन चुके हैं. माना जाता है हार्दिक पांड्या की जगह सूर्यकुमार यादव को कप्तान बनाने की जिद भी अगरकर की ही थी. वहीं लगातार सीनियर खिलाड़ियों को ड्रॉप करना और युवाओं को डेब्यू कैप थमाने का फैसला भी खूब चर्चा में रहा है.

बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने यह भी साफ कर दिया है कि वीवीएस लक्ष्मण को डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट नहीं बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बोर्ड ने ऐसे किसी विषय पर विचार नहीं किया है.

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