भारतीय क्रिकेट लंबे समय से युवा खिलाड़ियों पर अपना भरोसा दिखा रहा है. लेकिन इंग्लैंड क्रिकेट इस मामले में भारत से थोड़ा पीछे रहा है. इंग्लैंड में इंग्लिश काउंटी मिडिलसेक्स के साथ अपनी क्रिकेट अकेडमी लॉन्च के मौके पर सचिन ने इंग्लैंड में आ रहे युवाओं पर अपनी राय ज़ाहिर की. पहले टेस्ट में 31 रनों की जीत के बाद भी इंग्लैंड ने डेविड मलान जैसे अनुभवी खिलाड़ी को टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया. उनके स्थान पर 20 साल के युवा स्टार ओली पॉप को टीम के साथ जोड़ा गया. वहीं पहले टेस्ट में मैन ऑफ द मैच रहे सैम करन भी महज़ 20 वर्ष के हैं. उन्होंने अपने खेल से एक अलग पहचान बनाई. उनके इस तरह के प्रदर्शन के बाद ये ज़ाहिर होता है कि इंग्लिश टीम भी भारत की तर्ज़ पर अब युवा टैलेंट पर भरोसा दिखाने का मन बना चुका है. युवा सैम करन और ओली पोप को इंटरनेशनल टीम में मौके देने को एक सही फैसला करार देते हुए सचिन ने कहा कि ''जब मैंने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना डेब्यू किया था तो मैं 16 साल का था और ये चीज़ें आपकी मदद करती हैं. उस उम्र में मैंने वसीम अकरम, इमरान खान, वकार यूनुस और अब्दुल कादिर जैसे गेंदबाज़ों का सामना किया. जिससे आगे मुझे मदद मिली.'' सचिन ने कहा, ''क्योंकि इस उम्र में आपको डर नहीं लगता, आप सिक्के का सिर्फ एक पहलू देखते हो और मैदान पर जाकर बिना डरे अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हो, लेकिन अनुभव और परिपक्वता के साथ आप सिक्के का दूसरा पहलू भी देखते हैं और चीज़ों को बैलेंस करते हैं. इस उम्र में आपको सिर्फ मैदान पर जाकर अपना बेहतरीन खेल दिखाना होता है.'' साथ ही मास्टर ब्लास्टर बोले, ''अगर कोई खिलाड़ी अच्छा खेलता है तो वो देश के लिए खेल सकता है, उम्र किसी को चुनने का पैमाना नहीं हो सकती.''